रुड़की। जिले के 102 प्राथमिक स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके हैं। कुछ जर्जर भवनों के साथ साथ नये भवनों का निर्माण तो हुआ है, लेकिन अधिकतर जर्जर भवनों में ही बच्चे बैठने को मजबूर हैं। इन जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण को लेकर रिपोर्ट ग्रामीण निर्माण विभाग और शिक्षा निदेशालय में लटकी हुई है।
जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया बेहद लंबी है। सबसे पहले शिक्षा विभाग के अधिकारी जर्जर भवन के ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट ग्रामीण निर्माण विभाग को भेजते है। जिसके बाद ग्रामीण निर्माण विभाग भवन की जांच-पड़ताल करता है। इसकी ओर से एनओसी मिलने के बाद जिलाधिकारी के माध्यम से भवन के ध्वस्तीकरण की रिपोर्ट शिक्षा निर्देशालय को भेजी जाती है। जहां पर फाइनल रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय लगाता है। जिसके बाद ही जर्जर भवनों को ध्वस्त किया जाता हैं। वर्तमान में जिले के 102 स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके है। इनमें से प्रक्रिया पूरी होने के बाद नौ स्कूलों के भवन के ध्वस्तीकरण की अनुमति शिक्षा निदेशालय से मिल चुकी है, जबकि 60 स्कूलों के भवनों की रिपोर्ट डीएम के माध्यम से शिक्षा निदेशालय को भेजी जा चुकी है। जो की शिक्षा निदेशालय में विचाराधीन है। इसके साथ ही 32 स्कूलों के भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया ग्रामीण निर्माण विभाग में लटकी हुई हैं। कुल मिला कर 93 स्कूलों के भवनों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया लंबित है। कुछ जर्जर भवनों के साथ-साथ नये भवनों का निर्माण भी स्कूल कैंपस में कराया जा चुका हैं, लेकिन अधिकतर स्कूलों के जर्जर भवनों में ही बच्चे बैठने को मजबूर हैं।