रुड़की। चालक-परिचालकों की कमी से जूझ रहे रुड़की को जल्द आठ चालक और 10 परिचालक मिलेंगे। रोडवेज प्रशासन की ओर से इस संबंध में मुख्यालय को डिमांड भेज दी है।
इस समय डिपो में 72 चालक-परिचालक हैं। इनमें से कोई न कोई अवकाश पर भी रहता है। मार्च में पांच परिचालकों का प्रमोशन होने से डिपो में परिचालकों की कमी से स्थिति ओर बिगड़ गई है। चालक-परिचालकों के अभाव में डिपो में प्रतिदिन नौ बसें खड़ी रहती हैं। इससे आय प्रभावित हो रही है। रोडवेज प्रशासन का कहना है कि चालक-परिचालकों की कमी के कारण सभी बसों का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। रोडवेज प्रशासन ने मुख्यालय से आठ चालक और 10 परिचालकों की मांग की है। इस संबंध में कर्मचारियों और यूनियनों नेताओं का कहना है कि टाइम आफिस की ओर से केवल 27 बसों का शेड्यूल बनाने के बाद नौ बसों का संचालन नहीं हो रहा है। इससे डिपो की आय भी प्रभावित हो रही है।
एंट्री खराब करने के विरोध में महाप्रबंधक को भेजा ज्ञापन
रुड़की। डिपो के 80 प्रतिशत कर्मचारियों की वार्षिक एंट्री खराब करने के मामले में उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने जीएम संचालन और मंडलीय महाप्रबंधक को एक ज्ञापन भेजा है। इसमें यूनियन के शाखा अध्यक्ष ईशम सिंह ने कहा कि कर्मचारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डिपो की ओर से 2016-17 की 80 प्रतिशत कर्मचारियों की गोपनीय प्रवृष्टि खराब कर दी है। आरोप है कि वरिष्ठ केंद्र प्रभारी की ओर से चालक-परिचालकों की ड्यूटी में भेदभाव अपनाया जा रहा है। यदि स्थिति में सुधार नहीं किया तो कर्मचारी 10 अप्रैल से 14 अप्रैल तक सामूहिक अवकाश के लिए बाध्य होंगे। यूनियन की ओर से एजीएम और वरिष्ठ केंद्र प्रभारी पर वर्कशॉप में वाहनों की चेकिंग न करने का भी आरोप लगाया। डिपो के एजीएम जेके शर्मा ने बताया कि रोडवेज कर्मचारियों की एसीपी को लेकर वार्ता हो चुकी है। चालक-परिचालकों की कमी से बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। मुख्यालय को कुछ चालक परिचालकों की डिमांड भेज दी है। चालक-परिचालक मिलने के बाद अच्छे परिणाम आएंगे। ब्यूरो