ब्यूरो/अमर उजाला, रुड़की
विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को सीबीआरआई रुड़की और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कृषि एवं घरेलू प्रदूषण को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खतरनाक बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य जैव विविधता को संरक्षित रखने के महत्व पर जागरूकता पैदा करना, पर्यावरण की समस्या के प्रति सजग होना और सुधारात्मक कार्रवाई करने के तरीकों की जानकारी प्राप्त करना था। इस दौरान पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के प्रांगण में पौधारोपण और इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि कंक्रीट क्वालिटी कांसेप्ट्स प्राइवेट लिमिटेड एवं हितेश कंक्रीट सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. बाला सुब्रह्मण्यम कांदास्वामी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण घरेलू और कृषि वायु प्रदूषण है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाना पकाने, ताप और प्रकाश के लिए घर में जीवाश्म ईंधन, लकड़ी, अन्य बायोमास आधारित ईंधन का उपयोग होता है। इससे गृहणियों को सांस की बीमारी का खतरा रहता है। वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों से ग्रामीण पर्यावरण अनुकूल और सस्ती प्रौद्योगिकी विकसित कर प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि आईआईटी रुड़की के रसायन अभियांत्रिकी विभाग के प्रोफेसर डॉ. विकास मोहंती ने कहा कि हमारे परिवहन ही कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन, डीजल उत्सर्जन से वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं। वाहन उत्सर्जन को कम करना, क्लीनर ईंधन, अक्षय स्रोतों से ऊर्जा दक्षता और उत्पादन बढ़ाने के लिए नीतियों, कार्यक्रमों व निवेश से वायु गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है। इस मौके पर द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के चेयरमैन डॉ. अचल मित्तल ने सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहन, कार शेयरिंग या साइकिल उपयोग, मीथेन उत्सर्जन में कटौती, मांस और दुग्धालय का कम उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। संस्थान निदेशक डॉ. एन गोपालकृष्णन ने कहा कि सीबीआरआई पर्यावरण अनुकूल भवन सामग्री विकसित कर इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सही दिशा में काम कर रही है।