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जस देई देणु ह्वै जई तेसु मां का देशा मेरा गढ़देसा है

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रुड़की। सर्वहित कामना समिति शफीपुर की ओर से केएलडीएवी कॉलेज ग्राउंड में मकर संक्रांति एवं नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, अनुराधा निराला और अनिल बिष्ट ने अपनी-अपनी प्रस्तुति देकर लोगों को झूमने को मजबूर किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी राकेश भट्ट, अति विशिष्ट अतिथि प्रदीप बत्रा विधायक, मेयर यशपाल राणा, प्रदीप नेगी, आचार्य पंडित रमेश सेमवाल ज्योतिषाचार्य द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। पूरा कार्यक्रम लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के नाम रहा। संध्या में नेगी के गढ़वाली गीतों पर लोग देर तक झूमते रहे। नेगी ने मंच से जब अपने लोकगीतों की शुरुआत की तो खचाखच भरी भीड़ ने उनके गीतों पर जमकर ठुमके लगाए। नेगी की प्रस्तुति की शुरुआत देवताओं को समर्पित ‘जो जस देई देेणु ह्वै जई तेसु मां का देशा मेरा गढ़देसा है’ गीत से की। इसके बाद नेगी और अनुराधा निराला ने संयुक्त रूप से ‘माछी पाणी सी ज्यू तेरू, मेरू बिना तेरू नि जियेंदु नि रयेंदु त्वे’ बिना प्रस्तुत कर समां बांधा। इसके अलावा उन्होंने ‘ए जांदी भग्यानी तों ज्वानी का छोंदा.., भलु लगदू भनुली तेरो मठु-मठु हिटणु रे.., मेरी सुरमा सरेला सुरमा ए जई.. ठंडो रे ठंडो मेरो पहाड़कू हवा ठंडो पाणी, पहाड़ी-पहाड़ी मत बोलो जी देहरादून वाला हूं’ ने कई गढ़वाली गीतों की प्रस्तुति देकर तालियां बटोरी। लोक गायक अनिल बिष्ट ने ‘हुंगरा लगांदी भग्यानी नाके की नथुली’ गीत प्रस्तुत कर तालियां बटोरी। गढ़वाली कलाकारों में नरेंद्र सिंह नेगी, उषा नेगी, अनुराधा निराला, अनिल बिष्ट, कविदास नेगी आदि कलाकारों ने भी गीतों की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोहा। इस दौरान समिति अध्यक्ष भगवती प्रसाद जखमोला, उपाध्यक्ष कमलेश्वर प्रसाद कोटनाला, प्रबंधक भगवती प्रसाद बहुखंडी, कोषाध्यक्ष प्रतिभा, संरक्षक दिनेश बड़ौला, सदस्य सुनील भारद्वाज, दीपक नौटियाल, मुकेश बड़थ्वाल, संजय अरोड़ा, गौरव गोयल, कांग्रेसी नेता जितेंद्र पंवार, पूर्व प्रधानाचार्य वासुदेव पंत, सुनील धस्मान, मुकेश पांडे ,सतीश नेगी, राजेंद्र रावत, पल्लवी कुकरेती आदि उपस्थित रहे।
इनसेट
बेरोजगारी है पलायन की वजह
रुड़की। लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पहाड़ों पर रोजगार नहीं है तो लोग पलायन ही करेंगे। इसके लिए सरकार को वहां अच्छी सड़कें और रोजगार मुहैया कराना होगा। तभी पहाड़ों से पलायन की समस्या को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शहर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य यहां के लोगों को पहाड़ की संस्कृति से रूबरू करना है।
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