रुड़की। गन्ना समितियों का विकास कमीशन दबाए बैठी शुगर मिलों पर कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है। विभागीय अधिकारियों के बार-बार आदेश जारी करने के बाद भी मिल इस ओर ध्यान नहीं दे रही हैं। जिसके चलते अब विभागीय अधिकारियों ने मिलों पर बकाया कमीशन की जानकारी समितियों से मांगी है। विभागीय अधिकारी कमीशन न देने वाली मिलों के खिलाफ अब आरसी काटने की तैयारी कर रही हैं।
शुगर मिल, गन्ना समितियों के माध्यम से किसानों का गन्ना खरीदती हैं। इसके एवज में मिल द्वारा उचित एवं लाभकारी मूल्य का तीन प्रतिशत कमीशन समितियों को देती हैं। इससे समितियां अपना और अपने कर्मियों का खर्च वहन करती हैं लेकिन, आंकड़ों पर नजर डालें तो तीनों मिलों पर समितियों का 2011-12 के बाद से करीब 15 करोड़ रुपये का कमीशन बकाया है। इस अवधि में सरकार ने मिलों को राहत देने के लिए तीन साल का कमीशन समितियों को देने का वादा किया था लेकिन, सरकार ने इसे आज तक नहीं दिया। जिसकी वजह से समितियों की हालत पतली हो गई है। समितियों अपने कर्मियों को वेतन तक नहीं दे पा रही है। इस स्थिति में मिलों से विकास कमीशन निकालने के लिए विभाग प्रयासरत हैं। पिछले दिनों ज्वाइंट कैन कमिशनर ज्ञानचंद इमलाल ने सभी समितियों के अधिकारियों को मिलों का इंडेंट तक रोकने के आदेश दिए थे। इस पर डीसीओ आशीष नेगी द्वारा ली मीटिंग में तय किया था कि मिल प्रत्येक माह कमीशन का कुछ रुपये समितियों को देंगे, लेकिन नहीं दिया जा रहा है। एक मिल ने करीब पांच लाख का कमीशन दिया भी है लेकिन, यह केवल न के बराबर है। अब गन्ना विभाग सख्त हो गया है। ज्वाइंट कैन कमिशनर ज्ञान चंद इमलाल ने बताया कि सभी समितियों से कमीशन को लेकर जानकारी मांगी हैं। इसके बाद भी यदि मिल कमीशन नहीं देते तो मिलों की आरसी जारी की जाएगी।