रुड़की। रुड़की का सिविल लाइंस क्षेत्र जहां आवास बनाना शहर ही नहीं आस-पास के क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी शान माना जाता है। वहां की संपत्तियों का स्वामितृत्व का मुद्दा मौजूदा सरकार की नजूल भूमि में भी निस्तारण नहीं किए जाने से स्थानीय लोग खासे नाराज और परेशान है। निकाय चुनाव आने से पहले एक बार फिर सिविल लाइंस क्षेत्र की बेशकीमती संपत्तियों का मामला बड़ा बन गया है। शुक्रवार को रुड़की पहुंचे सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से मिलकर स्थानीय निवासियों ने इस क्षेत्र की संपतियों का निस्तारण कराने की अपील की। सांसद ने उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
अंग्रेजों के जमाने से ही रुड़की के एक बड़े भूभाग पर स्थिति सिविल लाइंस क्षेत्र की स्वामितत्व का विवाद चला आ रहा है। कई बार यह मुद्दा सामने आ चुका है कि यहां की जमीनें न तो राजस्व विभाग के स्वामितत्व की है, न सिंचाई विभाग, न लोक निर्माण विभाग, नगर निगम अथवा किसी अन्य सरकारी विभाग के स्वामितत्व की नहीं है। इस लिए इन्हें नजूल भूमि बताकर यहां लीज की व्यवस्था की जाती रही है। आलीशान मकान, प्रतिष्ठान और शोरूम आदि होने के बाद भी लोगों को यहां स्वामित्व का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। पिछले दिनों त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार की कैबिनेट में पारित की गई नजूल भूमि संबंधी नीति में भी रुड़की की संपत्तियों का निस्तारण नहीं करने से स्थानीय निवासी खासे नाराज है। इन दिनों यह मुद्दा शहर में सबसे ज्वलन मुद्दा बना हुआ है। शुक्रवार को रुड़की आए सांसद निशंक के सामने भी यह मुद्दा उठा। लैंड एंड हाउस आर्नस वेलफेयर एसोसिएशन सिविल लाइंस रुड़की के पदाधिकारियों ने सांसद को ज्ञापन देकर इस स्पृष्ट किया कि ये जमीनें नजूल भूमि की श्रेणी में आती ही नहीं है। इसके बावजूद इनका निस्तारण नहीं किया जा रहा है। जिससे करीब सात हजार परिवार अपना वैधानिक अधिकारी पाने से वंचित है। प्रतिनिधि मंडल ने सांसद से इंसाफ दिलाने की मांग की। उनके तर्क सुनकर सांसद ने भी माना कि इस क्षेत्र की संपत्तियां नजूल भूमि श्रेणी में नहीं आती है। उन्होंने हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नितिन सिंह भदौरिया को फोन कर इस पूरे मामले का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर कराने की बात कहीं। सांसद से मिलने वालों में विधायक प्रदीप बत्रा, वाईपी सिंह, आरडी सिंह, संजय गोयल, संजय गुप्ता, राजेश गुप्ता, प्रदीप कुमार, अरविंद गुप्ता, डीके जैन, अनिल अरोड़ा, सुरजीत सिंह, अरविंद कश्यप, रतन लाल, विनय कुमार बड़ी संख्या में लोग शामिल थे।
राज्य बनने के बाद से ही उठती रही है मांग
सिविल लाइंस क्षेत्र की संपत्तियों को फ्री होल्ड कराकर उन पर काबिज लोगों को ही मालिकाना हक दिलाए जाने की मांग राज्य के गठन के तुरंत बाद से ही उठती रही है। चाहे सरकार कांग्रेस की रही हो, या भाजपा की। हर सरकार ने इस मुद्दों को प्राथमिकता से हल कराने का भरोसा दिलाया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था। भाजपा के पूर्व सरकार के मंत्री भी लोगों को आश्वस्त करते रहे। मौजूदा सरकार ने भी भरोसा तो दिलाया था, लेकिन निस्तारण किसी ने नहीं किया, ऐसे में लोग हताश और निराश है। साथ ही नजूल भूमि पर काबिज लोगों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नीति के अंर्तगत वसूली जाने वाली राशी के नोटिश आने से भी धबरा रहे है।
बोले विधायक-
कई बार सरकारी समितियां यह स्पृष्ट कर चुकी है कि रुड़की का सिविल लाइंस क्षेत्र नजूल भूमि नहीं है। खुद सरकार के प्रतिष्ठान जिनमें आईआईटी, सीबीआरआई, डाक खाना आदि उपक्र म इसी ्षेत्र की भूमि पर स्थित है। ऐसे में नजूल भूमि अथवा विवादित भूमि कह कर लोगों को स्वामित्व का अधिकार नहीं दिया जाना उचित नहीं है। वे सरकार के स्तर पर इस बारे में बात करेंगे। मुख्यमंत्री और शहर विकास मंत्री को नये शीशे से तथ्य दिखाकर कर लोगों की समस्या का निराकरण कराया जाएगा।
विधायक, प्रदीप बत्रा
भाजपाईयों को चुनाव का भी सता रहा डर
सिविल लाइंस क्षेत्र की संपत्तियों का समुचित निस्तारण नहीं होने के कारण भाजपा नेताओं को निकाय चुनाव में यह चुनावी मुद्दा बनने और इसका नुक्सान होने का डर भी सता रहा है। भाजपाईयों की बैठकों में अक्सर यह मुद्दा चर्चा का विषय बनता रहता है। संगठन के माध्यम से भी भाजपाई इस मुद्दे के निराकरण के लिए सरकार पर दबाओ बनाने का प्रयास कर रहे है। पार्षद अभिषेक चंद्रा और तनुज राठी ने हरिद्वार रुड़की प्राधिकरण के हरिद्वार स्थित कार्यालय में पहुंचकर अधिकारियों से वार्ता करते हुए इस क्षेत्र के पुराने दस्तावेज भी देखे। अभिषेक चंद्रा ने बताया कि किसी भी स्तर पर सिविल लाइंस क्षेत्र नजूल भूमि साबित नहीं हो पा रहा है।