रुड़की। एसएसपी ने नवरात्रों और रामनवमी त्योहार पर विगत वर्षों में हुए विवादों के मद्देनजर संबंधित क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश अधीनस्थों को दिए हैं। इस बाबत सभी कोतवाली और थाना प्रभारियों को विशेष कदम उठाए जाने के लिए आदेशित किया है।
एसएसपी हरिद्वार कृष्ण कुमार वीके की ओर से जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि नवरात्र और रामनवमी त्योहार पर विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा एवं जागरण आदि के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में सांप्रदायिक घटनाएं की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सभी कोतवाली एवं थाना प्रभारियों को निर्देशित किया है कि ऐसे सभी स्थानों पर विशेष सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं, जहां विगत वर्षों में शोभायात्रा एवं जागरण आदि के दौरान विवाद हुआ हो। एसएसपी ने कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाले असामाजिक तत्वों को चिह्नित कर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने के लिए भी कहा है। साथ ही ऐसी नई जगहों पर शोभा यात्रा आदि की अनुमति नहीं दिए जाने कि के भी निर्देश दिए हैं जिससे शांति व्यवस्था भंग होने का खतरा हो। इसके अलावा नवरात्र पर आयोजित होने वाले सार्वजनिक कार्यक्रमों में छेड़छाड़ एवं अन्य अपराधिक घटनाओं के मद्देनजर भी विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। वहीं एसएसपी ने प्रभारी डॉग स्क्वायड को निर्देशित किया है कि वह मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस अड्डा आदि सार्वजनिक स्थानों पर सघन अभियान चलाकर जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए हैं।
इस बार नवरात्र पर बन रहा भद्र योग, सभी के लिए कल्याणकारी
रुड़की। इस वर्ष चैत्र नवरात्र में चार ग्रहों के एक साथ होने से भद्र योग बन रहा है जो सभी के लिए कल्याणकारी होगा। कलश स्थापना का मुहूर्त प्रात: 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्य राकेश कुमार शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि 18 मार्च से शुरू हो रहे नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र के समय भद्र योग बन रहा है, जो सूर्य, चंद्र, बुध एवं शुक्र ग्रह के एक साथ होने के कारण है। यह योग सभी के लिए कल्याणकारी होगा।
ज्योतिषाचार्य राकेश कुमार शुक्ला ने जानकारी देते हुए बताया कि नववर्ष में राजा सूर्य एवं मंत्री पद शनि देव के पास होने से राजनीतिक दलों में विघटन की स्थिति भी उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि 18 मार्च को चैत्र नवरात्र की प्रतिपदा तिथि शाम 6:30 बजे तक रहेगी। इसलिए रविवार को प्रात: से शाम तक किसी भी समय कलश की स्थापना की जा सकती है, लेकिन विशेष मुहूर्त प्रात: काल 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक अति उत्तम होगा। उन्होंने बताया कि प्रथम नवरात्र को कलश की स्थापना कर नवरात्र पूजन करना अति शुभ होगा।
इस तरह करें पूजन से पूर्व कलश की स्थापना
मिट्टी अथवा किसी धातु के घड़े में शुद्ध जल एवं गंगाजल डालकर उसमें चंदन, दूर्वा, द्रव्य, सुपारी, कुशा, पंचरत्न, पंच पल्लव आदि डालें। इसके बाद लाल वस्त्र में श्रीफल यानी नारियल लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें। इस कलश में सभी देवी देवताओं, तीर्थों एवं वेदों आदि का आह्वान करें। कलश स्थापना से पूर्व उसके नीचे धान्य अथवा सप्तधान्य रखकर षोडशोपचार द्वारा पूजन करना चाहिए। इससे नवरात्र पूजन एवं व्रत करने वाले जातकों को सभी प्रकार के मनोवांछित फल प्राप्त होंगे।