अमर उजाला ब्यूरो
रुड़की। डेंगू ने शहर में दस्तक दे दी है। एक व्यक्ति में डेंगू लक्षण मिले हैं। एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां उसका उपचार हो रहा है। वहीं, डेंगू को लेकर महकमा भी सतर्क हो गया है। साथ ही डेंगू से निपटने को लेकर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम ने इंतजाम शुरू कर दिये हैं।
शहर और देहात क्षेत्र में पिछले चार सालों से बरसात के बाद डेंगू अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर देता है। वर्ष 2016 में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद हरिद्वार में 474 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। जबकि वास्तविकता में यह आंकड़ा कहीं ज्यादा था। यही नहीं डेंगू से पीड़ित करीब 10 लोगों की मृत्यु भी हो गई थी। पिछले साल डेंगू के इस प्रकोप से निपटने को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी हरबंस चुग ने नगर निगम एक बैठक बुलाकर तमाम सरकारी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी सहयोग लिया था। इसके लिए तमाम जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए थे। डेंगू ने फिर से शहर में दस्तक दे दी है। मकतूलपुरी निवासी बुखार से पीड़ित एक व्यक्ति की खून की जांच कराए जाने उसमें डेंगू के लक्षण पाए गए हैं। व्यक्ति का उपचार एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। हालांकि उसकी हालत में अब सुधार है। लेकिन चिंताजनक बात है कि यह इस केस ने बता दिया है कि डेंगू ने क्षेत्र में अपनी फिर से दस्तक दे दी है।
नगर निगम के सफाई निरीक्षक अमित कुमार ने बताया कि डेंगू और मलेरिया को देखते हुए निगम की ओर से पुख्त इंतजाम किए जा रहे है। निगम ने एक ई-रिक्शा खरीदी है। जिसके जरिये निगम कर्मी डोर टू डोर जाएंगे और घरों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराएंगे। इस ई-रिक्शा के माध्यम से डेंगू के प्रति जागरूकता को लेकर रिकार्डिंग भी बजेगी। जिसमें डेंगू से सावधानी की बातें बताई जाएंगी। क्षेत्र बड़ा होने की वजह से एक-दो ई-रिक्शा और खरीदी जाएगी।
सिविल अस्पताल में छह बैड का वार्ड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। प्रत्येक बैड पर मच्छरदानी भी लगाई गई है। इसके अलावा डेंगू की रैबिट किट की भी डिमांड भेजी गई है। इस किट से डेंगू की जांच की जाती है। हालांकि अस्पताल के पास फिलहाल यह किट मौजूद है। लेकिन जरूरत को देखते हुए इसकी डिमांड भेज दी गई है।