21 बनखंडी में अमर उजाला के मिशन अपराजिता कार्यक्रम में शामिल महिलाएं
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कन्या भ्रूण हत्या, बालश्रम, महिला उत्पीड़न जैसे अपराधों को रोकने के लिए सरकार ने कानून तो बना दिए लेकिन जमीनी स्तर पर इसका सही ढंग से पालन नहीं हो रहा है। इसमें सबसे बड़ी कमी जनजागरुकता की है। जब तक समाज इसके प्रति जागरूक नहीं होगा तब तक ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाना असंभव है। इसके लिए महिलाओं को स्वयं जागरूक होना जरूरी है। शनिवार को बनखंडी में मिशन अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय नारी स्वाभिमान ट्रस्ट की अध्यक्ष मुकेश चौधरी ने किया। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तीकरण की बात हर जगह की जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि धरातल पर इसे कोई लागू नहीं किया जा रहा। कन्या भ्रूण हत्या पर रोक नहीं लग पा रही है। चोरी छिपे ऐसे अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है। खुलेआम बच्चों से होटलों और दुकानों में काम करवाया जा रहा है। महिला उत्पीड़न के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। सरकार ने इन अपराधों को रोकने के लिए कानून तो बना दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका सही ढंग से पालन नहीं हो पा रहा है।
महिलाएं शिक्षा के अभाव में अपनी बातें सार्वजनिक रूप से बताने में कतराती हैं। ऐसी महिलाएं अकसर जानकारी के अभाव में उत्पीड़न का शिकार हो जाती हैं। ऐसे परिवारों को जागरूक करने से ही समस्या का समाधान किया जा सकता है। - सीमा मिश्रा, समाजसेवी
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रति हम सबको एक जनजागरुक आंदोलन चलाने की जरूरत है। जब तक बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रति समाज जागरूक नहीं होगा तब तक महिला सशक्तीकरण के सपने को साकार नहीं किया जा सकता है। - अंशु आहूजा, शिक्षिका
वर्तमान में महिलाएं काफी हद तक शिक्षा के प्रति जागरूक हुई हैं लेकिन पिछड़े व गरीब तबके के परिवारों में अभी शिक्षा का अभाव है। ऐसे लोग बेटियों को पढ़ाने में अब भी लापरवाही बरतते हैं। इन लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। - आरती शर्मा, समाजसेवी
वर्तमान में पुरुष प्रधान समाज को भी नारी के स्वाभिमान को बनाए रखने के लिए अपने नजरिये को बदलने की सख्त जरूरत है। नारी शक्ति स्वरूपा होती है। वह पुरुष से कंधे से कंधा मिलाकर परिवार व समाज की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। - सीमा खुराना, गृहणी