जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित सर्वोदयी कार्यकर्ता विमला बहुगुणा पंचतत्व में विलीन हो गई। उनका अंतिम संस्कार पूर्णानंद घाट पर किया गया। उनके बेटे राजीव नयन बहुगुणा व प्रदीप बहुगुणा ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे। टिहरी प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर तहसीलदार अयोध्या प्रसाद ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान रखने वाले पर्यावरणविद स्व. सुंदर लाल बहुगुणा की पत्नी विमला बहुगुणा का शुक्रवार को उनके देहरादून स्थित निवास पर देहांत हो गया गया था। विमला देवी करीब 93 साल की थी। शनिवार को विमला देवी का अंतिम संस्कार मुनि की रेती स्थित पूर्णानंद घाट पर किया गया।
सुबह करीब साढ़े 11 बजे विमला बहुगुणा की शव यात्रा पूर्णानंद घाट पहुंची। यहां विभिन्न संगठनों, स्थानीय निवासियों व प्रशासन ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। परिजनों ने गंगा में पार्थिव शरीर को अंतिम स्नान कराया। उसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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इन्होंने दी श्रद्धांजलि
मुनि की रेती पालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण, पर्यावरणविद समीर रतूड़ी, चकबंदी आंदोलन के प्रणेता विजय जड़धारी, प्रमुख समाजसेवी अनिल स्वामी, प्रदीप तिवाड़ी, तहसीलदार नरेंद्र नगर अयोध्या प्रसाद उनियाल, कांग्रेस नगर अध्यक्ष राकेश मियां, दीपक प्रताप जाटव आदि ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
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प्रशासन में नहीं रहा सामंजस्य
विमला बहुगुणा के अंतिम संस्कार को लेकर देहरादून व टिहरी प्रशासन में सामंजस्य नहीं रहा। टिहरी प्रशासन के अधिकारियों का कहना था कि उन्हें शनिवार सुबह पौने 10 बजे जानकारी दी गई कि विमला देवी का अंतिम संस्कार पूर्णानंद घाट पर होगा। इसके लिए प्रतिनिधि के तौर पर तहसीलदार नरेंद्रनगर पूर्णानंद घाट पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से एक मात्र प्रतिनिधि वहीं मौजूद थे। घाट पर अंतिम संस्कार को लेकर कोई खास व्यवस्था भी नहीं की गई थी।