सिंगटाली मोटर पुल का शिलान्यास नहीं होने पर 27 अप्रैल को सिंगटाली में धरना की चेतावनी भू कानून संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों ने दी है।
शुक्रवार को प्रेसक्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया ने कहा कि प्रदेश सरकार टिहरी और पौड़ी जिले को आपस में जोड़ने वाले मोटर पुल के निर्माण को करीब 19 साल लटका रही है। अब स्थानीय लोग और सिंगटाली मोटर पुल संघर्ष समिति के पदाधिकारी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे।
सिंगटाली मोटरपुल संघर्ष समिति के विनोद बड़थ्वाल ने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री भुवनचंद्र खंडूड़ी ने 2006 में कौडियाला-ब्यासघाट मोटर मार्ग के निर्माण के साथ ही सिंगटाली में गंगा नदी के ऊपर मोटर पुल स्वीकृत किया था। इसके लिए 15.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे।
ब्यासघाट से (ढांगूगढ़) कौडियाला तक रोड कटिंग करने के बाद विश्व बैंक पौड़ी ने सिंगटाली में पुल निर्माण के लिए प्रथम चरण का काम पूरा कर दिया था। 2019 में तत्कालीन त्रिवेंद्र रावत सरकार ने इस मोटर पुल को निरस्त करवा दिया था। तब आश्वासन दिया था कि यह पुल सिंगटाली से तीन किमी आगे देवप्रयाग की ओर बनाया जाएगा।
तीरथ सिंह रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद 18 मई 2021 को पुल को उसी स्थान पर बनाने का शासनादेश जारी हुआ। लेकिन उनकी सरकार जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उसके बाद लोनिवि श्रीनगर गढ़वाल ने सिंगटाली मोटर पुल की ऊपर की साइड नए स्थान पुल के लिए चयनित किया।
करीब दो साल से लोनिवि इस पुल की डीपीआर, डिजाइन में उलझा हुआ था। कहा कि 27 अप्रैल को क्षेत्रीय जनता सिंगटाली में एक दिवसीय धरना देगी। यदि उससे पहले प्रदेश सरकार की ओर से शिलान्यास कार्यक्रम नहीं किया गया आंदोलन की रणनीति भी बनाई जाएगी। इस अवसर पर श्रीकांत मैठाणी, सुरेंद्र नेगी, पंकज मैठाणी, संजय सिलस्वाल आदि उपस्थित रहे।