शिवपुरी क्षेत्र में बडल गांव के 150 परिवार गंभीर जल संकट से गुजर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां ग्रामीणों को दो-दो दिन बाद पानी मिलता है। वहीं, गांव में संचालित रिजॉर्ट और कैंप संचालक खुलेआम सरकारी हैंडपंपों और पानी के स्रोतों पर कब्जा जमाए बैठे हैं।
जल संस्थान कि ओर से लगाए गए करीब छह से सात हैंडपंप है जो कभी गांव वालों और पर्यटकों की प्यास बुझाते थे। अब ये रिजॉर्ट मालिकों की निजी संपत्ति बन गए हैं। इन हैंडपंपों में सबमर्सिबल मोटर डालकर पानी सीधे रिजॉर्ट और कैंप में खींचा जा रहा है। यहां ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और रिजॉर्ट वाले साफ पानी से स्विमिंग पूल भर रहे हैं।
पूर्व प्रधान बीना भंडारी का कहना है कि गांव में रेलवे परियोजना का काम तेजी से चल रहा है, जिससे नियमित जल आपूर्ति पहले से ही बाधित है। इसके बावजूद रिजॉर्ट संचालक पानी को व्यावसायिक सुविधा की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि ग्रामीण मजबूरी में रेलवे परियोजना के लिए आने वाले टैंकरों से पानी भरकर गुजारा कर रहे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि बार-बार शिकायत के बाद भी जल संस्थान के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे और न ही किसी रिजॉर्ट संचालक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस मुद्दे को ग्राम पंचायत की खुली बैठक में रखा जाएगा। वहीं ग्राम प्रधान रिंकी पुंडीर ने कहा कि मौके पर जाकर निरीक्षण किया जाएगा।
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कोट
- मामला संज्ञान में नही है। यदि कैंप संचालक सरकारी हैंडपंप से छेड़छाड़ कर रहे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - नरेश पाल सिंह, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान