श्रीदेव सुमन विवि ने छात्र हित में लिया फैसला, ईसी ने किया अनुमोदित, विवि से संबद्ध हैं 270 काॅलेज
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए नहीं लगानी पड़ेगी विवि मुख्यालय की दौड़
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत श्रीदेव सुमन विवि के छात्र-छात्राओं को अपनी उत्तर पुस्तिका की प्रतिलिपि देखने के लिए विवि के मुख्यालय नहीं जाना होगा। विवि प्रशासन अब छात्रों को मेल पर ही उत्तर पुस्तिका की प्रतिलिपि उपलब्ध कराएगा। इससे छात्रों के पैसे और समय की बचत होगी।
श्रीदेव सुमन विवि में परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से असंतुष्ट होने पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राए सूचना अधिकार अधिनियम के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिलिपि मांगते हैं। इसके लिए छात्र-छात्राओं को निर्धारित शुल्क अदा करना पड़ता है। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिलिपि को प्राप्त करने के लिए छात्र-छात्राओं को श्रीदेव सुमन विवि के मुख्यालय बादशाहीथौल जाना पड़ता है।
वर्तमान में श्रीदेव सुमन विवि से राज्य के करीब 270 काॅलेज संबद्ध है। ऐसे में राज्य के दूरस्थ क्षेत्र के काॅलेजों के छात्रों को विवि के मुख्यालय तक पहुंचने में समय और पैसों की बर्बादी से जूझना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। विवि प्रशासन अब छात्र हित में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत परीक्षाओं के उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिलिपि मेल पर उपलब्ध कराएगा। विवि की कार्य परिषद (एग्जीक्यूटिव काउंसिल) विवि के इस प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है। छात्रों ने विवि के इस फैसले का स्वागत किया है।
आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिलिपि छात्र को मेल पर उपलब्ध कराना विवि प्रशासन का छात्र हित में लिया गया बेहतर निर्णय है। इसका सीधा फायदा छात्र-छात्राओं को होगा। - साक्षी तिवारी, छात्र संघ अध्यक्ष, ऋषिकेश परिसर
छात्र-छात्राएं उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए खासे परेशान रहते थे। आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिका की प्रतिलिपि मांगने पर छात्र-छात्राओं को विवि मुख्यालय का चक्कर काटना पड़ता था। जिसमें पैसों के साथ ही समय की भी बर्बादी होती थी। अब विवि प्रशासन ने बेहतर निर्णय लिया है। - अमन पांडे, छात्र संघ सचिव, ऋषिकेश परिसर
अब छात्रों को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत उत्तर पुस्तिकाओं की प्रतिलिपि मेल पर ही उपलब्ध हो जाएगी। इसके लिए छात्रों को विवि मुख्यालय नहीं आना होगा। इससे कागज की भी बचत होगी। साथ ही छात्र-छात्राओं को भी फायदा होगा। - प्रो. एनके जोशी, कुलपति, श्रीदेव सुमन विवि उत्तराखंड