हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले दिन मुखर्जी मार्ग से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। इस दौरान करीब दो दर्जन खोखे, तीन दर्जन नाली के ऊपर प्रतिष्ठानों की सीढ़ियों को ध्वस्त किया गया। स्थानीय व्यापारी नेता, दुकानदार और खोखाधारक निगम की टीम और पुलिस से बहस, नोकझोंक और प्रार्थना करते भी नजर आए। वहीं, मुखर्जी मार्ग की शुरूआत में निर्मल आश्रम की ओर से बनाया गया प्रवेश द्वार को भी ध्वस्त करने की कोशिश की गई। जब सफलता नहीं लगी, तो बाद में इसे रात को हेडर की सहायता से ध्वस्त करने पर सहमति बनी।
सुबह करीब 10 बजे नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी पुलिस बल मुखर्जी मार्ग पहुंचे। यहां शुरूआत में ही निगम की टीम ने दुकान से बाहर निकले हुए छज्जों को चिह्नित करते हुए इन्हें तोड़ने के आदेश जारी किये। इस पर स्थानीय दुकानदार सहित व्यापारी नेता मौके पर पहुंच कर निगम की कार्रवाई का विरोध करने लगे। हल्की बहस होने के बाद निगम की जेसीबी ने इन्हें ध्वस्त किया। इसके बाद टीम ने गोपाल मंदिर के आसपास बने प्रतिष्ठानों श्री ज्वैलर्स, भूमि एप्रेयल, एओ, एडिडाश, शगुन ज्वैलर्स आदि की सीढ़ियों को नाली के ऊपर बना होने के कारण ध्वस्त कराया। टीम जैसे ही आगे बढ़ी नोकझोंक की स्थिति बन गई। इसके बावजूद टीम ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रखी। टीम ने लाजपतराय मार्ग का रुख किया और यहां वर्षों से जमे खोखों को ध्वस्त किया।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू होते ही व्यापारी नेता विवेक वर्मा स्थानीय दुकानदारों के समर्थन में वहां पहुंचे। उन्होंने चिल्लाते हुए निगम की टीम को कहा कि सबसे पहले मुखर्जी मार्ग ही दिख रहा है क्या...। इस दौरान काफी देर तक नोकझोंक होती रही। स्थानीय दुकानदार सहित अन्य व्यापारी नेता निगम की कार्रवाई का विरोध करते दिखे। निगम की टीम और व्यापारियों में गहमागहमी के बीच जेसीबी ने अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद व्यापारी नेता विवेक वर्मा ने कहा पहले निर्मल आश्रम का प्रवेश द्वार तोड़ो। व्यापारियों की जिद पर निगम की टीम ने निर्मल आश्रम के प्रवेश द्वार को तोड़ने के लिए जेसीबी चलाई। लेकिन प्रवेश द्वार ध्वस्त नहीं हो सका। इसके बाद निर्माण विभाग के सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण ने कहा कि यह जेसीबी से नहीं टूट सकता, इसके लिए रात को बिना ट्रैफिक पर हेडर की मदद से इसे तोड़ा जाएगा। इसके बाद टीम आगे बढ़ गई।
सीढ़ी से टाइल्स निकालने पर निगम टीम ने रोका
निगम की कार्रवाई के दौरान कई बंद पड़े प्रतिष्ठानों के व्यापारी वहां मौजूद रहे। दरअसल वह अपने साथ मजदूर लेकर आए थे। निगम की टीम को अपने प्रतिष्ठान की ओर आता देख मजदूर इनकी सीढ़ियों से टाइल्स निकालने में लगे रहे। तभी निगम की टीम ने टाइल्स निकाल रहे मजदूरों को रोक दिया और इसके बाद सीढ़ियों को ध्वस्त किया गया। लाजपतराय मार्ग पर निगम की टीम ने यहां बनी लोहे की सीढ़ियों की ओर इशारा किया। तभी एक आदमी आया और सहायक अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण से कहने लगा कि इसे मत तोड़िए, यह घर को जाने के लिए बनाई गई है। इसके बाद वहां सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी पहुंचे और ध्वस्त करने को कहने लगे। तभी उक्त आदमी हाथ जोड़कर उनसे विनती करता नजर आया और कहने लगा सर सीढ़ी मत हटाओ, यह 1945 की बनी है। एसएनए ने उनकी एक न सुनी और सीढ़ी को ध्वस्त कराया।
ध्वस्तीकरण से पूर्व हटाया वाटर कूलर
लाजपतराय मार्ग पर व्यापारियों के लिए वाटर कूलर लगाया हुआ था, लेकिन निगम की टीम ने इसे भी ध्वस्त करने को कहा। इस पर स्थानीय व्यापारियों ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पूर्व इस वाटर कूलर को वहां से हटाया।
जनहित याचिका पर कार्रवाई
उच्च न्यायालय में ऋषिकेश निवासी अनिल गुप्ता ने बीते 21 अप्रैल 2010 को जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में ऋषिकेश क्षेत्र से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे, नगर क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का जिक्र था। इस पर न्यायालय ने 24 अगस्त 2018 को संबंधित विभागों को सरकारी भूमि, फुटपाथ, अवैध कब्जों से मुक्त करने का आदेश दिया था। साथ ही बिना मानचित्र स्वीकृत कराए गए निर्माण को सील करने का आदेश दिया। न्यायालय के आदेश का सोमवार से नगर निगम ने पालन करना शुरू कर दिया है।
अतिक्रमण की कार्रवाई से पूर्व सामान हटाते दुकानदार- फोटो : RISHIKESH