रायपुल विकास खंड के मालकोट क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों का संपर्क मोटर मार्ग से कट जाता है। दरअसल, बरसात में विदालना नदी के उफनने से आवागमन ठप होने से ग्रामीण घरों में कैद हो जाते हैं। यही वजह है कि वर्ष 1990 से ग्रामीण मोटर मार्ग पर विदालना नदी के ऊपर पुल बनाने की मांग उठाते आ रहे हैं। पुल का प्रस्ताव ढाई दशक से सरकारी फाइलों में थपेड़े खा रहा है। राहत की बात यह कि अब मोटर मार्ग पर पुल बनने का रास्ता साफ हो गया।
इसे विडंबना ही कहेंगे कि अविभाजित उप्र के समय से भोगपुर-सिंधवाल गांव मोटर मार्ग के बीच में पड़ने वाली विदालना नदी पर मोटर पुल निर्माण की मांग उठ रही है, जो पृथक राज्य उत्तराखंड गठन के 26 साल बाद पूरी होने जा रही है। कभी सर्वे तो कभी वन विभाग का अड़ंगा पुल निर्माण में दखल बनता रहा। बरसात में विदालना नदी का जलस्तर बढ़ने से गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है।
स्कूली बच्चे घरों में कैद और किसी के बीमार पड़ने पर उसे उपचार नहीं मिल पाता है। सिंधवाल गांव के पूर्व प्रधान राजपाल सिंधवाल ने बताया कि मोटर पुल के निर्माण के लिए ग्रामीणों ने लंबा संघर्ष किया है, उसी का नतीजा है पुल निर्माण को मंजूरी मिलना।
दो मुख्यमंत्री कर चुके थे घोषणा
बरसाती नदी विदालना के ऊपर मोटर पुल के निर्माण की घोषणा तत्कालीन दो मुख्यमंत्री सार्वजनिक कार्यक्रम में कर चुके हैं, लेकिन घोषणा परवान नहीं चढ़ सकी। पूर्व प्रधान ने बताया कि वर्ष 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवाड़ी और वर्ष 2011 में रमेश पोखरियाल निशंक ने पुल निर्माण की घोषणा की थी। पुल का निर्माण दर्जनों गांवों की लाइफ लाइन है।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
विदालना नदी में मोटर पुल के निर्माण से मालकोट क्षेत्र के सिंधवाल गांव, हल्दवाड़ी, जाकर, कैरवान, फरती, पल्याडांडा, मिसलसारी, नाही कला, उडिया आदि गांवों को लाभ मिलेगा। इन गांवों के लोगों को यातायात की सुविधा मिलेगी।
पुल निर्माण की अनुमानित लागत सात करोड़
लोक निर्माण विभाग, डोईवाला के अधिशासी अभियंता पीसी जोशी ने बताया कि वित्त विभाग ने मोटर पुल निर्माण की टेक्निकल आडिट रिपोर्ट स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री को सौंप दी है। 110 मीटर लंबे स्पान पुल के निर्माण की अनुमानित लागत सात करोड़ रुपये है। वित्तीय मंजूरी मिलते टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।