ऋषिकेश। देवभूमि ऋषिकेश का गंगा तट शुक्रवार की शाम गढ़ संस्कृति के एतिहासिक कार्यक्रम का गवाह बना। नगर निगम ऋषिकेश, नमामि गंगे प्रकोष्ठ उमंग और हेमवतीनंदन बहुगुणा केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के संयुक्त तत्वावधान में उत्तराखंडी लोक वाद्यों पर केंद्रित कार्यशाला ‘हिमालयी निनाद’ का त्रिवेणीघाट पर सांस्कृतिक संध्या के बाद समापन हो गया। इसमें कलाकारों ने लोक वाद्य यंत्रों के माध्यम से ऐसा समा बांधा कि हर कोई देखता रह गया। एक के बाद एक तारत्मयता के साथ बजे गढ़वाली साजों ने पूरे वातावरण में मधुर संगीत की सुर लहरियां बिखेर दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं मेयर अनिता ममगाईं ने कहा कि गढ़वाल की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम सदैव प्रयासरत रहेगा। त्रिवेणीघाट पर महागंगा आरती के बाद शुक्रवार की शाम ‘हिमालयी निनाद’ कार्यशाला के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उत्तराखंडी वाद्य यंत्रों की लाजवाब प्रस्तुतियां दीं। मेयर ने कहा अपनी संस्कृति को बचाने और इसे आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। इससे पूर्व गंगा स्तुति के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में उत्तराखंडी पोशाकों में सजे-धजे कलाकारों ने अपनी अविरल प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में मौजूद हर किसी का मन मोह लिया। कार्यक्रम का संचालन गणेश कुकशाल ने किया। इस अवसर पर गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी, पर्यावरणविद कल्याण सिंह रावत, महंत लोकेश दास, कृष्ण आचार्य, शंकर तिलक, सुरेंद्र मोघा, संजीव चौहान, दिव्या बेलवाल, पंकज शर्मा, रामरतन रतूड़ी, कमलेश जैन, कमला गुनसोला, ज्योति सजवाण, डॉ. सर्वेश उनियाल, विजेंद्र मोघा, विजय बडोनी, बंशीधर पोखरियाल, सुनील थपलियाल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
नहीं पहुंचे केंद्रीय मंत्री निशंक
ऋषिकेश। त्रिवेणीघाट पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था, लेकिन ऐनवक्त पर उनका कार्यक्रम स्थगित हो गया। निशंक ने वर्चुअल माध्यम से अपनी शुभकामनाएं भेजीं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाते हैं और नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि गढ़वाल की सांस्कृति धरोहर विराट और अविरल है, इसके पोषण और प्रसार के लिए और भी अधिक प्रयास किए जाने की जरूरत है। जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण और जागर गायिका बसंती बिष्ट भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुईं।