हरिद्वार ऋषिकेश रेल खंड पर रायवाला के समीप जंगल में भारी भरकम पेड़ गिरने से रेल यातायात करीब दो घंटे बाधित रहा। इस दौरान बाड़मेर ऋषिकेश एक्सप्रेस रायवाला मोतीचूर के बीच खड़ी रही। जिससे हरिद्वार-देहरादून और हरिद्वार-ऋषिकेश रेलखंड पर रेल यातायात बाधित रहा। पेड़ गिरने से इलेक्ट्रिक लाइन क्षतिग्रस्त हुई है। रेलवे कर्मियों करीब दो घंटे बाद यातायात सुचारू किया।
घटना सोमवार अपराह्न करीब 3:30 बजे की है। यहां हरिद्वार और रायवाला के बीच मोतीचूर जंगल में एक भारी भरकम पेड़ रेलवे ट्रैक पर गिरने से इलेक्ट्रिक लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसकी सूचना मिलते ही रेलवेकर्मी मौके पर पहुंचे। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद रेलवे ट्रैक पर गिरे भारी भरकम पेड़ को काटकर हटाया।
रेलवे के पावर वैगन की मदद से कर्मचारियों ने इलेक्ट्रिक लाइन को दुरुस्त किया। इस दौरान बाड़मेर से ऋषिकेश जाने वाली बाड़मेर ऋषिकेश एक्सप्रेस रायवाला मोतीचूर के बीच करीब दो घंटे तक खड़ी रही। जिसके चलते देहरादून से हरिद्वार जाने वाली उपासना एक्सप्रेस, हरिद्वार से ऋषिकेश जाने वाली गंगा नगर बाड़मेर एक्सप्रेस, ऋषिकेश से प्रयागराज जाने वाली प्रयागराज एक्सप्रेस करीब दो घंटे लेट हुई।
रायवाला स्टेशन मास्टर नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि अचानक हरिद्वार देहरादून रेल मार्ग पर मोतीचूर जंगल में एक पेड़ रेलवे ट्रैक पर गिर गया। रेलवे कर्मचारियों द्वारा उसे हटाकर क्षतिग्रस्त इलेक्ट्रिक लाइन को दुरुस्त किया गया। करीब 5:30 बजे हरिद्वार देहरादून और ऋषिकेश रेल मार्ग पर यातायात शुरू कर दिया गया है।
रेलवे फाटक बंद होने से लगा जाम हरिद्वार-दून राजमार्ग तक जा पहुंचा
रायवाला। रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिर जाने से करीब दो घंटे तक रेल यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान ग्राम पंचायत रायवाला प्रतीत नगर खंड गांव और गौरी माफी का मुख्य मार्ग पार्बोना रेलवे फाटक अधिकांश समय बंद रहा। इसकी वजह से रेलवे फाटक के दोनों और वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी रही।
यहीं नहीं, फाटक बंद होने से लगा जाम हरिद्वार देहरादून राजमार्ग तक जा पहुंचा, जिसके चलते हाईवे पर दौड़ रहे वाहन भी प्रभावित हुए। वहीं दूसरी ओर रायवाला रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ दिखाई दी। यात्री ट्रेन के आने का इंतजार करते रहे। रेल मार्ग खुल जाने के बाद रेल यात्रियों ने राहत की सांस ली।
वही पेड़ गिर जाने के बाद मोतीचूर जंगल में खड़ी बाड़मेर एक्सप्रेस के कुछ यात्री उतरकर अपनी जान जोखिम में डालकर जंगल के रास्ते होते हुए हाईवे तक पहुंचे और अन्य वाहनों की मदद से वह अपने-अपने गंतव्य को रवाना हुए। संवाद