ऋषिकेश। उत्तराखंड वाणिज्य कर मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन (राज्य कर) की ओर से छठे द्विवर्षीय महाधिवेशन में कर्मचारियों की प्रमुख मांगें रखी गईं। इसमें कहा कि कर्मचारियों को जीएसटी के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाए। कर्मचारियों की ओर से इस बाबत विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को ज्ञापन भी दिया गया।
बाईपास रोड पर स्थित खांडगांव में आयोजित अधिवेशन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के संयोजक ठाकुर प्रह्लाद सिंह ने कहा कि प्रदेश की आय का 60 प्रतिशत राजस्व राज्य कर से ही आता है। प्रदेश में 2017 में जीएसटी लागू हो गया था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों का ढांचा तय नहीं हो पाया है। इसमें स्थिति यह हो रही है कि कुछ कर्मचारियों के पास तो काम का बोझ है, कई कर्मचारी खाली बैठे रहते हैं। उन्होंने कहा कि नवीन कर प्रणाली (जीएसटी) के अनुसार कर्मचारियों को एक्ट, रूल, एमएस एक्सल, टैली, ईआरपी अन्य के बारे में लंबा प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इसके अलावा कर्मचारियों के स्थानांतरण की नीति बनाई जाए। रिक्त पदों को पदोन्नति के जरिए भरा जाए। ऑडिट की व्यवस्था ठीक की जाए। राज्य कर अधिकारी के पदों पर समय-समय पर पदोन्नति के लिए लोक सेवा आयोग को अधियाचन भेजा जाए। जिन क्षेत्रों में अनावासीय भवनों के साथ आवासीय भवनों को निर्माण कराया जा रहा हो, वहां पर कर्मचारियों की तैनाती के हिसाब से निर्माण किया जाए। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि राज्य कर कर्मचारियों की जितनी भी समस्याएं हैं, सभी के निराकरण के लिए शासन में वार्ता की जाएगी। सभी मांगों को पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
इस अवसर पर विरेंद्र रावत, भानु प्रकाश रावत, प्रशांत मैठाणी, नंद किशोर, रवि पांडेय, ओमवीर, बलवंत रावत, जगमोहन नेगी, कैलाश जोशी, गीताराम डोभाल, हरीश चंद्र राणा, ध्यान सिंह रावत, भगत सिंह राणा आदि थे।
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एसीपी के नियम में हो बदलाव
तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से कर्मचारियों के एसीपी (समयबद्ध वेतनमान) 10,16,20 को 10,16, और 26 कर दिया था। इसे वर्तमान सरकार ठीक नहीं कर पाई। कर्मचारी इसे पुरानी तर्ज पर करने की मांग कर रहे हैं।