गरीबों को आशियाना देने को पीएम की प्रधानमंत्री आवास योजना को तीर्थनगरी में आवेदकों का टोटा है। एक साल में महज 500 लोगों ने मकान के लिए आवेदन किया है। जिनमें से विभाग ने जांच के बाद 122 लोगों का चयन किया है। कम आवेदन आने की सबसे बड़ी वजह नगर पालिका और जनप्रतिनिधियों का इस योजना के लिए प्रचार प्रसार न करना है।
प्रदेश में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना राज्य नगरीय विकास अभिकरण के द्वारा संचालित की जा रही है।
योजना को आर्थिक रूप से दो वर्गों में बांटा गया है। पहली योजना में तीन लाख तक की सालाना आय वर्ग को शामिल किया गया है। जिसमें ऐसे लोगों को प्राथमिकता दी जानी है, जो झुग्गी झोपड़ियों, लकड़ी पानी से बनी झोपड़ी में निवास करते हैं। जबकि दूसरे वर्ग में छह लाख सालाना आय वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है। जिनमें नौकरी पेशा वर्ग, छोटे व्यापारी को शामिल किया गया है। योजना में वैसे तो कच्चे घर वाले लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही गई। पर उन तक सही से जानकारी न पहुंच पाने के कारण ऐसे लोग आवेदन ही नहीं कर सके। यही कारण रहा कि साल भर में केवल पांच सौ लोगों ने आवेदन किया। स्थानीय निवासी केवट साहनी, परमेश्वर का कहना है क्षेत्र में काफी संख्या में लोग बेघर है। योजना की विभाग द्वारा सही से जानकारी दी जाती तो पात्रों की संख्या में वृद्धि होती।
इनकी सुनिए
प्रधानमंत्री आवास योजना को सफल बनाने के लिए सभी सभासदों को प्रचार-प्रसार करने के लिए कहा गया था। नगरपालिका में उक्त योजना की जानकारी की सूचना भी लगाई गई थी। कुछ लोग योजना की पात्रता को कागज के अभाव मे पूरा नहीं कर पा रहे हैं। पात्र व्यक्तियों की नगरपालिका पूरी मदद कर रहा है। सभी सभासदों को योजना का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दोबारा से जारी किये जाएंगे।
वीपीएस चौहान, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका ऋषिकेश
यह है योजना और प्रक्रिया
नगरपालिका परिषद कर एवं राजस्व निरीक्षक निशात अंसारी ने बताया कि योजना में ऐसा व्यक्ति या परिवार जिनकी सालाना आय तीन लाख से अधिक और छह लाख से ज्यादा न हो आवेदन कर सकता है। योजना में तीन लाख सालाना आय वालों को इतनी ही कम ऋण पर एक लाख 50 हजार सब्सिडी, छह लाख सालाना आय वर्ग को इतने ही ऋण राशि पर दो लाख 20 हजार की सब्सिडी दी जाएगी। सब्सिडी के बाद बचा पैसा पंद्रह सालों में वापस करना होगा। इस राशि पर नियमानुसार ब्याज वसूल किया जाएगा।