राजाजी टाईगर रिजर्व के मोतीचूर रेंज में रामनगर से लाई गई बाघिन को जंगल में छोड़ते पार्ककर्मी
- फोटो : RISHIKESH
रायवाला। राजाजी टाइगर रिजर्व में टाइगर का कुनबा बढाने की बहुप्रतिक्षित परियोजना का प्रथम चरण पूरा करने में राजाजी प्रशासन को सफलता मिल गई। शुक्रवार को एनटीसीए की निगरानी में मादा बाघिन को जंगल में छोड़ दिया गया। अब राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या तीन हो गई है।
शुक्रवार की सुबह राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज में टाइगर परियोजना के प्रथम चरण की प्रक्रिया को मौके पर उपस्थित नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी के सदस्य सचिव एसपी यादव और मुख्य वन्यजीव संरक्षक जेएस सुहाग की निगरानी में अंजाम दिया गया। राजाजी टाइगर के निदेशक डीके सिंह ने बताया कि एक दिन पहलेेे बृहस्पतिवार की सुबह रामनगर से 10 सदस्य प्रशिक्षित ट्रांसलोकेशन टीम की मदद से चार वर्षीय बाघिन का सुरक्षित तरीके से गोपनीय ढंग से लाया गया था। जिसे मोतीचूर रेंज में बनाए गए टाइगर बाड़े में चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया था। बृहस्पतिवार को बाघिन को जंगल में छोड़ दिया गया। बाघिन को जीपीएस कॉलर पहनाया गया है, जिसकी लगातार सेटेलाइट से मॉनिटिरिंग की जा रही है। बताया कि राजाजी टाइगर रिजर्व में पहले से दो मादा बाघों के बाद रामनगर से लाकर छोड़ी गई बाघिन को मिलाकर रेंज में अब बाघिनों की संख्या तीन हो गई है। इसके अलावा रेंज में जमीनी स्तर पर भी चार से पांच टीमें बाघिन की हर गतिविधि पर निगरानी कर रही हैं। परियोजना के तहत धीरे-धीरे दो बाघों सहित दो अन्य मादा बाघों को लाने की प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। वहीं पार्क में बाघ को छोड़ने के बाद पार्क में पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। इस अवसर पर डब्लूडब्लूएफ के सदस्य एसके सिंह, रेंजर महेंद्र गिरि आदि उपस्थित रहे।