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गंगा की स्वच्छता और निर्मलता पर संत महात्माओं ने जताई चिंता

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मायाकुंड कृष्णकुंज आश्रम में बैठक करते अखिल भारतीय संत समिति के सदस्य। - फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। मायाकुंड कृष्णकुंज आश्रम में अखिल भारतीय संत समिति एवं नमामि गंगे की ओर से गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में संत, महात्माओं और गंगा प्रेमियों ने स्वच्छ एवं अविरल गंगा व महाकुंभ पर्व 2021 विषय पर विचार व्यक्त किया।
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मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में संत, महापुरुषों ने महाकुंभ पर्व पर गंगा की धारा को निर्मल और अविरल बनाने पर चर्चा की। संतों ने कहा कि कुंभ मेले में उत्तराखंड सरकार को 20 से 25 फीसद बजट ऋषिकेश में विकास कार्यों के लिए देना चाहिए था, इसके लिए संत समाज प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजेगा। गंगा की धारा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए गंगा में किसी भी प्रकार की सामग्री प्रवाहित न किया जाए। राफ्टिंग और कैंपों में मादक पदार्थ व मांस का सेवन पूर्णत: वर्जित होना चाहिए। प्रदेश सरकार को इसके लिए सख्त कानून बनाना चाहिए। संतों की ओर से गंगा घाटों पर सफाई करने के लिए एक निश्चित समय होना चाहिए। गंगा को स्वच्छ एवं अविरल बनाने के लिए कुंभ मेले में त्रिवेणीघाट का विस्तार करना चाहिए।
संत ईश्वरदास ने कहा कि मां गंगा पतित पावनी है, कुंभ महापर्व में गंगा का आचमन के बिना मोक्ष की प्राप्ति नहीं होगी। मोक्ष की प्राप्ति मानव को तभी होगी, जब इसे स्वच्छ एवं निर्मल रखा जाएगा। कुंभ क्षेत्र देवप्रयाग प्रदेश सरकार की उदासीनता का दंश झेल रहा है। अलकनंदा और भागीरथी के संगम को कुंभ मेला बजट से वंचित किया गया है। इस मौके पर दयारामदास, ईश्वरदास, केशवस्वरुप, सुखवीर सिंह, भगवती प्रसाद, संतोष गिरी, स्वामी असंगानञंद, रवि शास्त्री, मंहत गोपल गिरी, विजय गिरी, गणेेशदास महाराज आदि शामिल थे।
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