यमकेश्वर ब्लॉक की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे चल रही हैं। लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली का आलम यह है कि करीब आठ साल पहले स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत स्वीकृत आठ किलोमीटर सिमलखेत-घाईकल मार्ग का निर्माण अभी तक शुरू तक नहीं हो पाया है। जबकि, मार्ग के लिए वित्तीय स्वीकृति और सर्वे सहित सभी जरूरी कार्य पूरे हो चुके हैं। मार्ग नहीं बनने से करीब आधा दर्जन गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2007-08 में प्रखंड के अनुसूचित ग्राम सिलमखेल घाईकल के लिए आठ किमी मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली थी। स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत प्रस्तावित इस मार्ग के लिए करीब एक करोड़ की वित्तीय मंजूरी भी है। इसके बावजूद कार्यदायी संस्था सड़क निर्माण नहीं करा रही है। लिहाजा ग्रामीणों को सड़क के अभाव में पगडंडियां नापनी पड़ रही हैं।
मार्ग के निर्माण से हल्दोगी, फूलचट्टी, सिमलखेत, घाईकल आदि क्षेत्रों के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलनी थी। स्थित यह है कि मार्ग को वित्तीय मंजूरी तो मिली ही है, साथ ही लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन मार्ग का सर्वे कार्य भी पूरा करा चुका है। लेकिन मार्ग निर्माण फिर भी शुरू नहीं किया गया।
पटना के ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह भंडारी ने बताया कि सड़क नहीं बनने से करीब आधा दर्जन गांवों के हजारों लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग मार्ग निर्माण की बजाए उसके मानचित्र में परिवर्तन की फिराक में है। उन्होंने चेताया कि ऐसा किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे।
सुविधा नहीं तो वोट नहीं
सामाजिक कार्यकर्ता सत्यपाल सिंह राणा का कहना है कि मार्ग के निर्माण से उक्त गांव बैराज-कांडी स्टेट हाईवे से जुड़ सकते हैं। लेकिन स्वीकृत योजना में विभाग दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी इस ओर उदासीन बने बैठे हैं और लोग परेशान हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि शीघ्र सड़क नहीं बनी तो लोग सुविधा नहीं तो वोट नहीं का उद्घोष करेंगे।
लाखों रुपये बढ़ जाएगा सड़क का इस्टीमेट
2008 में स्वीकृत सिलमखेल-घाईकल मोटर मार्ग का वर्तमान बजट करीब 30 लाख रुपये बढ़ गया है। तब विभाग की ओर से उस वक्त के रेट के तहत मार्ग का इस्टीमेट तैयार किया था। इसके बाद से कई बार सड़क निर्माण सामग्री के दाम बढ़ चुके हैं। तकनीकी जानकारों की मानें तो हर साल निर्माण सामग्री के दाम में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाती है। इस लिहाज से अब मार्ग निर्माण की कवायद शुरू होती है तो इसका खर्च बढ़ जाएगी। रि-इस्टीमेट में सड़क निर्माण की वर्तमान कास्ट करीब 30 लाख तक बढ़ सकती है।