पर्यटन विभाग की लापरवाही तीर्थ क्षेत्र में राफ्टिंग करने के इच्छुक पर्यटकों की जान पर भारी पड़ रही है। विभागीय हीलाहवाली के कारण राफ्टिंग संचालक अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में आठ से 10 पर्यटकों के लिए स्वीकृत राफ्टों में 13 से अधिक पर्यटकों को बिठा रहे हैं। लेकिन हैरत की बात है कि इसकी निगरानी करने वाला कोई नहीं है।
जिस पर्यटन विभाग ने लाइसेंस जारी किए हैं, उसने भी ओवरलोडिंग पर नियंत्रण रखने के लिए क्षेत्र में कोई कर्मचारी तैनात नहीं किया है। ऐसे में पर्यटकों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। तीर्थनगरी के समीप कौड़ियाला राफ्टिंग जोन में रोजाना हजारों सैलानी साहसिक खेल में प्रतिभाग और गंगा की लहरों का लुत्फ उठाने के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में कम समय में अधिक मुनाफा कमाने की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा में स्थानीय राफ्ट संचालक अधिक मुनाफा कमाने के फेर में नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। लेकिन राफ्ट संचालकों को लाइसेंस जारी करने वाला पर्यटन विभाग ही इस ओर मुंह फेरे हुए है। गंगा में क्षमता से अधिक पर्यटकों को बैठाकर राफ्टिंग कराई जा रही है।
ऐसे में ओवरलोडिंग के दौरान रैपिडों पर राफ्टों के पलटने से पर्यटक के साथ दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। लेकिन इसे रोकने वाले जिम्मेदार मूकदर्शक बने बैठे हैं। इस बाबत वन विभाग और पुलिस प्रशासन से जब ओवरलोड राफ्टों पर नियंत्रण लगाने की बात की जाती है तो संबंधित विभाग मामला पर्यटन विभाग का बताकर पल्ला झाड़ देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार कौन है।
ऐसा मामला संज्ञान में नहीं है। अगर नियम कायदों की अनदेखी हो रही है तो जल्द ही संबंधित कर्मचारियों को निर्देशित कर इसकी मॉनिटरिंग और उचित कार्रवाई की जाएगी।-शैलेश बगोली, सचिव पर्यटन