दृढ़ इच्छा शक्ति से कुछ भी संभव है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय मुनि की रेती की प्रधानाध्यापिका रजनी ममगाई ने इस कथन को सत्य साबित किया है। 11 वर्षों में विद्यालय में छात्रों की संख्या 11 से 117 तक पहुंचाई। व्यक्तिगत प्रयास से विद्यालय का कायाकल्प कराया। उत्कृष्ट कार्यों के लिए उनका चयन शैलेेश मटियानी पुरस्कार के लिए हुआ है।
रजनी ममगाई ने बताया कि वर्ष 1999 में उनकी पहली तैनाती राजकीय प्राथमिक विद्यालय चंद्रभागा में सहायक अध्यापिका के पद पर हुई थी। वर्ष 2014 में पदोन्नति के बाद उन्हें प्रधानाध्यापिका के पद पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय मुनि की रेती में तैनाती मिली। उनकी तैनाती के दौरान विद्यालय की छात्र संख्या मात्र 11 थी और विद्यालय भवन भी जीर्णशीर्ण था।
बताया कि तैनाती के दिन ही उन्होंने विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाने और स्वयं के प्रयासों से भवन की मरम्मत की ठान ली थी। उन्होंने विद्यालय भवन की मरम्मत के लिए शिवानंद आश्रम से संपर्क किया। आश्रम ने करीब सवा करोड़ रुपये की लागत से जीर्णशीर्ण विद्यालय भवन का कायाकल्प किया।
विद्यालय में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था भी है। रजनी कहती हैं कि वर्तमान में विद्यालय में छात्र संख्या 117 है। नए शिक्षा सत्र में इसे और अधिक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। विद्यालय के छात्र विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर पर भी प्रतिभाग कर चुके हैं। शिक्षिका रजनी ममगाई के उत्कृष्ट कार्याें को देखते हुए उन्हें राज्य स्तरीय शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार शिक्षक दिवस के अवसर पर दिया जाएगा।
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छात्राओं को मासिक धर्म में स्वच्छता के प्रति भी करती हैं जागरूक
रजनी ममगाई ने बताया कि वह छात्राओं को मासिक धर्म के बारे में जानकारी व इसमें स्वच्छता के प्रति जागरूक करती हैं। इसके साथ ही नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा स्वच्छता के लिए भी कार्य करती हैं।