दस मई से शुरू हुई केदारनाथ यात्रा तीन नवंबर को कपाट बंद होने के साथ बंद कर दी गई। इस यात्रा के दौरान एसडीआरएफ ने पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा देकर मेडिकल फर्स्ट रिस्पांडर की भूमिका निभाई है। इस साल करीब साढ़े सौलह लाख श्रद्धालुओं ने केदारनाथ की यात्र की है। इसमें 249 विदेशी भी शामिल हैं। केदारनाथ यात्रा के दौरान एसडीआरएफ की टीमों को सोनप्रयाग, लिंचोली और केदारनाथ जैसे संवेदनशील स्थानों पर नियुक्त किया गया था। एसडीआरएफ ने पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं को प्राथमिक चिकित्सा देकर 1500 से अधिक श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर के माध्यम से नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया। इस पूरी यात्रा के दौरान नदी के किनारे फंसे लगभग चालीस लोगों व विभिन्न ट्रैक पर फंसे बीस लोगों को रेस्क्यू भी किया गया।
Iआपदा के दौरान नौ दिन तक चले रेस्क्यू में भी दी मददI
जौलीग्रांट। 31 जुलाई की रात भारी बारिश से केदारनाथ यात्रा मार्ग सोनप्रयाग, गौरीकुंड और लिंचोली बुरी तरह से ध्वस्त हो गए थे। हजारों श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर फंस गए थे। लगभग नौ दिन तक चले रेस्क्यू के दौरान भारतीय सेना, एनडीआरएफ, स्थानीय पुलिस, डीडीएमए के साथ मिलकर एसडीआरएफ ने रेस्क्यू को सफलतापूर्वक पूरा कर करीब दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं को रेस्क्यू किया। इस दौरान हेलीपैड, वैकल्पिक मार्ग, रोप रिवर मैथेड में भी एसडीआरएफ ने सहयोग दिया।
Iचारधाम यात्रा खासकर केदारनाथ यात्रा के दौरान एसडीआरएफ की सभी टीमों ने सुरक्षा के साथ ही मेडिकल फर्स्ट रिस्पांडर की भूमिका भूमिका निभाई है। तैनात जवानों से फीडबैक मांगा गया है। फीडबैक से अगली यात्रा को और बेहतर व सुरक्षित बनाने के प्रयास किए जाएंगे।
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I-अपर्ण यदुवंशी, सेनानायक एसडीआरएफI