ऋषिकेश। स्वास्थ्य महकमे का लचर सिस्टम किसी से छुपा नहीं है। ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर झुलसे भरैव कॉलोनी ऋषिकेश के दो लड़कों में से एक की समय पर इलाज न मिल पाने के कारण मौत हो गई। बेटा गरीब का था, इसलिए गुमनाम सी मौत मर गया। न कहीं कोई हलचल हुई, न सुनवाई। स्वास्थ्य महकमे ने इलाज में हिलाहवाली की तो विद्युत विभाग अब मुआवजे के नाम पर कन्नी काट रहा है।
29 नवंबर की रात भैरव कॉलोनी में भांजी की शादी में खुशियां मना रहे दो युवक संजीत (21) पुत्र स्व. मुंशीराम और किशन (22) पुत्र नेपाली सिंह यहां लगे 11000 केवी विद्युत लाइन से जुड़े ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए थे। शनिवार रात संजीत ने दम तोड़ दिया, जबकि किशन अभी भी राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में भर्ती है। ट्रांसफार्मर जमीन पर ही लगा है। इसके चारों ओर जाली लगाई गई है, लेकिन तारों का जाल और घनी आबादी के बीच यह सब व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। करंट से झुलसने के बाद संजीत की हालत ज्यादा खराब थी। परिजन पहले एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ले गए, यहां से संजीत को देहरादून कोरोनेशन रेफर कर दिया गया। बेड खाली नहीं होने के कारण संजीत को वापस राजकीय चिकित्सालय भेज दिया गया। अगले दिन संजीत को फिर से रेफर करते हुए एम्स भेज दिया गया। एम्स में बर्न यूनिट न होने के कारण परिजन संजीत को पीजीआई चंडीगढ़ ले गए। जहां डॉक्टरों ने इलाज में पांच से सात लाख रुपये खर्च बताया। इसके अलावा संजीत के दोनों पैर और एक हाथ काटने पड़ेंगे। यह सुन परिजन सुन्न रह गए। एक तो पल्ले में पैसे नहीं, दूसरा संजीत की जिद-कि मैं मर जाऊंगा, लेकिन अपने हाथ-पैर नहीं कटवाऊंगा। आखिरकार परिजन उसे वापस घर ले आए, जहां अगले ही दिन घर पर संजीत ने दम तोड़ दिया। यह पूरी आपबीती संजीत के बड़े भाई शंकर ने अमर उजाला को बातचीत में बताई।
मदद के लिए आगे आने लगे थे लोग
ऋषिकेश। संजीत के बड़े भाई शंकर ने चंडीगढ़ पहुंचने के बाद फोन पर इलाज में खर्च होने वाले पैसों के बारे में कई लोगों से मदद की गुहार लगाई। इस पर पहले ही दिन भरत मंदिर के महंत वत्सल प्रपन्न शर्मा ने अपने भाई वरूण शर्मा के हाथों दस हजार रुपये की तत्काल मदद भिजवाई। शंकर ने बताया कि कई अन्य लोगों ने भी मदद का आश्वासन दिया था, लेकिन उससे पहले ही उनका भाई परलोक सिधार गया।
बेटा चला गया, अब मुआवजे का क्या करेंगे...
ऋषिकेश। संजीत की मौत की खबर सुनने के बाद अमर उजाला की टीम भैरव कॉलोनी स्थित उसके घर पर पहुंची। जहां उसकी 55 वर्षीय मां शिवानी, भाई शंकर, भाभी, बच्चे और बहन बदहवास हालत में थे। मां के आंसू रोके नहीं रुक रहे थे। बोली- अभी कुछ दिन पहले ही तो कह रहा था, हम तीनों भाई मिलकर खूब पैसा कमाएंगे और कहीं जमीन खरीदकर एक घर बनाएंगे। पता चला धनाभाव के कारण दो साल पहले बहन भी नवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ चुकी है। विद्युत विभाग का कोई अधिकारी मुवाअजे के तहत कोई बातचीत करने आया, पूछने पर बोले-कौन सा मुआवजा? फिलहाल तो कोई नहीं आया, लेकिन आ भी गया तो,
जब बेटा ही नहीं रहा, अब मुआवजे का क्या करेंगे?
कोट-
चंद्रभागा पुल के पास भैरव कॉलोनी में एक युवक करंट लगने से मौत होने पर ऊर्जा निगम की ओर से जांच के लिए विद्युत सुरक्षा विभाग को पत्र डाक द्वारा द्वारा भेज दिया गया है। जांच के बाद मृतक के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा दिलवाया जाएगा।
- धर्मपाल सिंह, अधिशासी अभियंता, ऊर्जा निगम ऋषिकेश
कोट-
यदि विद्युत दुर्घटना में घायल युवक की मौत हो गई है तो विद्युत सुरक्षा विभाग की ओर से पांच दिन के अंदर मौके पर पहुंचकर जांच की जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी। युवक के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।
- डीपी सिंह, विद्युत सुरक्षा अधिकारी, विद्युत सुरक्षा विभाग
चंद्रभागा नदी के किनारे लगे इसी ट्रांसफार्मर के करंट से घायल हुआ था संजीत। अब ऊर्जा निगम अपनी नाक- फोटो : RISHIKESH
संजीत की मौत के बाद बेसुध परिजन।- फोटो : RISHIKESH