नहरों के जीर्णोधार के बजट का प्रस्ताव शासन में फाइलों में कैद होकर रह गया है। जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें है। नहरों की जर्जर हालत को देखकर वो धान की रोपाई तक करने की हिम्मत नहीं कर पा रहे है। विभाग ने नहरों के पुर्ननिर्माण के लिए विगत वर्ष 6 करोड़ 47 लाख 56 हजार का प्रस्ताव शासन को भेजा, लेकिन अभी तक प्रस्ताव की फाइल अलमारी में कैद है।
इन दिनों ऋषिकेश के तमाम ग्रामीण इलाकों में खेतों में धान की रोपाई की तैयारियां चल रही है। लेकिन नहरों की दयनीय स्थिति होने के कारण काश्तकारों को पानी की चिंता सता रही है। ऐसे हालत में इन नहरों के सहारे खेेतों तक धान की रोपाई के लिए पानी पहुंचाना बेहद मुश्किल हो रखा है।
छिद्दवाला, साहब नगर डांड़ी, चकजोगीवाला, खैरी-खुर्द खदरी, ठाकुरपुर, गुलरानी में नहरों की जर्जर हालत के जीर्णोधार के लिए सिंचाई विभाग के उपखंड ऋषिकेश ने वर्ष 2015 में 6 करोड़ 47 लाख 56 हजार का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लेकिन शासन की उदासीनता के कारण आज तक एक भी प्रस्ताव का बजट स्वीकृत नहीं हो पाया। उपखंड के विभागीय अधिकारियों ने बताया कि उनके विभाग के पास क्षेत्र की छोटी-बड़ी 56 किलो मीटर की 18 नहरें हैं। जिनमें 68 गूल शामिल हैं। बहरहाल, शासन-प्रशासन की उदासीनता का दंश झेल रहे किसान और काश्तकारों को धान की रोपाई के लिए खेतों तक पानी लाने के लिए परेशानियां उठाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
ये योजनाएं अधर में
छिद्दरवाला, खदरी, गुलरानी नहर का जीर्णोधार और कैनाल रोड को पक्का करना
लागत- 4 करोड़ 49 लाख 85 हजार
खैरी-खुर्द, ठाकुरपुर जिर्णोधार- लागत- एक करोड़ 6 लाख 24 हजार
साहब नगर डांड़ी, चकजोगीवाला नहर का जीर्णोधार- लागत- 91 लाख 47 हजार
कोट...
वास्तव में कई क्षेत्रों में सिंचाई की नहरों की हालत बेहद खराब है। किसानों और काश्तकारों को खेतों में पानी लाने के लिए क्षतिग्रस्त हो चुकी नहरों का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। हमारी ओर से नहरों के जीर्णोधार और कुछ छोटी गूलों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। जैसे ही प्रस्ताव के अनुरूप बजट स्वीकृति मिलेगी निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
चंद्र मोहन भट्ट, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग उपखंड ऋषिकेश