एक तरफ मानवता के दुश्मन और दूसरी तरफ अनचाही जिंदगी को संवारने का जज्बा। बुधवार को कुछ ऐसा ही हरिपुरकला क्षेत्र में देखने को मिला। किसी दरिंदे ने पहले एक विक्षिप्त के साथ मुंह काला किया और उसे दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया।
ऐसे में एक सपेरा परिवार उसकी मदद को आगे आया और अब मामला संज्ञान में आने के बाद प्रशासन ने महिला और बच्चे को नारी निकेतन भेजने की बात कही है। बहरहाल नन्हे मेहमान के आगमन से जिस घर में खुशियों को बसेरा था अब वहां सन्नाटा है।
हरिपुरकलां में कई महीनों से एक विक्षिप्त महिला गीता कुटीर, गंगा सुरजपूर कालोनी और सूखी नदी के बीच घूमती रहती थी। आठ दिसंबर को उसने सूखी नदी में एक बच्चे को जन्म दिया। पास की सपेरा बस्ती के लोगों को जानकारी हुई तो बच्चे को गोद लेने की होड़ मच गई।
कई लोग बच्चे का रखने को तैयार थे, लेकिन विक्षिप्त को साथ ले जाने को कोई आगे नहीं आ रहा था। ऐसे में सपेरा बस्ती के ही पारसनाथ ने जच्चा और बच्चा दोनों को सहारा देने को बढ़ा। पारसनाथ के पहले ही चार बच्चे हैं। इसके बावजूद उन्होंने इस बच्चे और उसकी अभागी मां को भी पालने का जिम्मा लिया।
घर में नए नन्हे मेहमान की खुशी थी, लेकिन बुधवार का दिन उनके लिए मायूसी लेकर आया। पारसनाथ सुबह उठे तो उनके दरवाजे पर पुलिस और आसपास के लोग दस्तक दे रहे थे। सभी बच्चे और उसकी मां को नारी निकेतन भेजने के साथ मामले की जांच कर दोषी पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
ऐसे में पुलिस ने विक्षिप्त महिला और बच्चे को नारी निकेतन भेजने का निर्णय किया है। उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। जच्चा बच्चा को नारी निकेतन में भेजने की व्यवस्था की जाएगी, बताया कि दोनों स्वस्थ हैं।