शिक्षा संकाय (बीएड) के मामले में पीजी ऑटोनामस कॉलेज जहां का तहां खड़ा है। आठ साल बाद भी बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए कॉलेज प्रशासन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाया। तीन लाख रुपये की पाठ्य पुस्तकें कॉलेज की अलमारियों में बंद हैं, जिन्हें दीमक चट कर रही हैं। कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से शिक्षा संकाय के भवन में आवारा पशुओं का जमावड़ा रहता है। पीजी ऑटोनामस कॉलेज में बीएड शुरू न होने से तीर्थनगरी के युवाओं को बीएड में दाखिले के लिए प्राइवेट कॉलेजों की ओर से रुख करना पड़ रहा है।
भले ही प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा देने का दावा कर रही हो, लेकिन हकीकत इसके उलट है। उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के एकमात्र पीजी ऑटोनामस कॉलेज ऋषिकेश की ओर मुंह फेरे हुए है। यहां वर्ष 2008 में गढ़वाल विवि से 100 सीटों पर सेल्फ फाइनेंस बीएड पाठ्यक्रम करने की अनुमति मिली थी। बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए कॉलेज प्रशासन ने शिक्षा संकाय में तीन लाख रुपये की पाठ्य पुस्तकें, एक लाख का फर्नीचर और अन्य सभी सुविधाएं जुटाई थीं। शासन से शिक्षा संकाय के लिए एक विभागाध्यक्ष और सात असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति करने के लिए हरी झंडी भी मिली थी। लेकिन, एनसीईटी (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) ने जब कॉलेज का निरीक्षण किया तो फैकल्टी चयन को लेकर टीम ने व्यवस्थागत खामियां पाई।
विभागाध्यक्ष सहित असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए जिन आवेदकों ने आवेदन किया था। वह पहले से ही किसी अन्य कॉलेजों में कार्यरत थे। फैकल्टी चयन में मानकों की अनदेेेखी को देखते हुए एनसीईटी ने पीजी ऑटोनामस कॉलेज को शिक्षा संकाय शुरू करने की अनुमति नहीं दी। इस स्थिति के बाद कॉलेज प्रशासन ने दोबारा शिक्षा संकाय शुरू करने के लिए फिर से पैरवी नहीं की। बीएड के लिए कॉलेज प्रशासन ने जो तीन लाख की पाठ्य पुस्तकें क्रय की थी। वह अलमारियों में बंद है। साढ़े चार हजार पुस्तकों पर दीमक लगने शुरू हो गए हैं। शिक्षा संकाय का भवन देखरेख के अभाव में वीरान पड़ा हुआ है। वहां अब सिर्फ आवारा पशुओं को जमघट है।
शिक्षा संकाय शुरू करने का मामला मेरे कार्यकाल से काफी पहले का है। बीएड के लिए कितने की पुस्तकें और फर्नीचर क्रय किया गया, इसकी जानकारी नहीं है। फरवरी 2016 में जब यहां प्राचार्य की जिम्मेदारी मिली तो शिक्षा संकाय का भवन देखा। कर्मियों से पता करने पर बताया गया कि एनसीईटी से बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की मान्यता नहीं मिली है। कॉलेज में बीएड शुरू करने के लिए शासन स्तर पर दोबारा पैरवी की जाएगी। - डॉ. डीसी नैनवाल, प्राचार्य पीजी ऑटोनामस कॉलेज ऋषिकेश।