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एसटीपी बनकर तैयार, पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन

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चंद्रेश्वर नगर में बनकर तैयार हुआ एसटीपी। - फोटो : RISHIKESH
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इन दिनों तीर्थनगरी में विश्वविद्यालयों और पड़ोसी राज्यों के अफसर एसटीपी का मॉडल देखने के लिए आ रहे हैं। चंद्रेश्वर नगर स्थित इस प्रोजेक्ट देश के देश का पहला प्रोजेक्ट होने का दावा किया जा रहा है। जो वर्टिकल डायरेक्शन में तैयार हुआ एसटीपी बन कर लगभग तैयार हो चुका है। परियोजना के अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। हालांकि अभी इसकी तिथि तय नहीं है। यहां शुक्रवार से हाइड्रोलिक टेस्टिंग भी शुरू हो जाएगी। देशभर के तकनीकी विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हैं कि यह प्रोजेक्ट सफल हुआ तो एसटीपी स्थापना के क्षेत्र में किसी कमाल से कम नहीं होगा।
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नमामि गंगे परियोजना के तहत चंद्रेश्वर नगर में साढ़े सात एमएलडी का एसटीपी बनकर तैयार हो गया है। परंपरागत होरिजोंटल डिजाइन में न होकर इसे वर्टिकल स्वरूप में तैयार किया गया है। यह एसटीपी महज 970 वर्गमीटर में सात मंजिल का बनाया गया है। यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो पूरे देश में यह तकनीक लागू होने की संभावना है।
नमामि गंगे के परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप के मुताबिक आम तौर पर किसी भी एसटीपी को मूर्त रूप देने के लिए प्रति एमएलडी के हिसाब से साढे़ सात सौ वर्गमीटर का क्षेत्रफल जरूरी होता है। इस लिहाज से यदि परंपरागत तरीके से चंद्रेश्वर नगर स्थित इस एसटीपी को बनाया जाता तो करीब आठ हजार वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता होती। 12 करोड़ में तैयार इस परियोजना की हाइड्रोलिक टेस्टिंग शुक्रवार से शुरू हो जाएगी। इसमें गंगा का पानी डालकर तकनीकी सफलता आंकी जाएगी।
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स्वीडन से ली तकनीक
ऋषिकेश। परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप के मुताबिक हमारे इंजीनियरों ने डिजाइन तैयार किया। इसके बाद परियोजना को संचालित करने के लिए तकनीक की खोजबीन शुरू हुई। वेलिया नामक स्वीडिश कंपनी से मोविंग बेड बायो रियेक्टर (एमबीबीआर) नामक तकनीक क्रय की गई। अब ये प्रोजेक्ट देश के स्वच्छता अभियान को परवाज देने के लिए तैयार हो चुका है।
स्लज बेड बनाने को मिली हरी झंडी, खर्च होंगे करीब आठ करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। एसटीपी से निकलने वाले स्लज के संभावित संक्रमण से अब छुटकारा मिल सकेगा। स्थानीय लोगों की ओर से लगातार आ रही शिकायत की जा रही आपत्ति के बाद नमामि गंग अफसरों ने इसका संज्ञान लिया है। नमामि गंगे के परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप ने बताया कि ढालवाला स्थित चोरपानी में पांच एमएलडी का एसटीपी संचालित है।
इसके अलावा श्यामपुर स्थित लक्कड़घाट में 26 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी का ट्रायल रन किया जा रहा है। दोनों ही प्लांटों से निकलने वाले स्लज को खाद में तब्दील करने के लिए स्लज बेड बनाया जाएगा। इसके लिए ड्राइंग बनाने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि पूर्व योजना के तहत एसटीपी से निकलने वाले स्लज को नगर निगम के संभावित ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप करने की योजना था। मौजूदा हालात ये हैं कि नगर निगम ने लालपानी में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए वन विभाग की जमीन तो चयनित कर ली है लेकिन अभी प्रोजेक्ट को मूर्त रूप लेने में वर्षों की अवधि लगने की संभावना है। उधर, नमामि गंगे के दो एसटीपी संचालित हो चुके हैं जबकि एक टेस्टिंग मोड में है।
लिहाजा वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण एसटीपी परिसर में ही स्लज डंप किया जा रहा है। एसटीपी के आसपास रहने वाले लोगों ने स्लज से उठने वाली दुर्गंध और संक्रमण के खतरे की संभावना जताते हुए कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया। आखिरकार निगम के ट्रंचिंग ग्राउंड की आस छोड़ नमामि गंगे अफसरों ने खुद ही स्लज प्रबंधन की राह निकालनी शुरू कर दी है। चोरपानी और लक्कड़घाट एसटीपी के ठेकेदारों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे स्लज बेड की ड्राइंग तैयार कर सौंपे। दोनों एसटीपी के स्लज बेड बनाने में करीब आठ करोड़ का व्यय होगा। उधर, चंद्रेश्वर नगर एसटीपी से निकलने वाले स्लज को लक्कड़घाट एसटीपी परिसर में डंप कर खाद बनाया जाएगा।
आईआईटी जारी करेगा डीबीडी सर्टिफिकेट
ऋषिकेश। वीरभद्र मार्ग पर बिछाई जा रही सीवर लाइन के कारण खुदी सड़कें परेशानी का सबब बन गई हैं। आए दिन प्रदर्शन और शिकायतों का दौर जारी है। खुदी सड़कों को एक ओर लोक निर्माण विभाग बनाने की कसरत कर रहा है दूसरी ओर धंसाव की स्थिति पैदा हो रही है। इस मुसीबत से निपटने के लिए अब नमामि गंगे अफसरों ने तकनीक का सहारा लिया है। परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप ने बताया कि आईआईटी रुड़की अब ड्राइ बल्क डेंसिटी (डीबीटी) सर्टिफिकेट जारी करेगा। इसके बाद लोनिवि सड़क निर्माण कर पाएगा। उन्होंने बताया कि आईआईटी बीबीडी के लिए प्रति सेंपल दस हजार रुपए शुल्क लिए लेता है। इसके लिए आईआईटी को शुल्क अदा कर दिया गया है। प्रथम चरण में करीब तीन किलोमीटर के दायरे में हुए कंपेक्शन का डीबीडी होना है। उन्होंने बताया कि तीन सौ मीटर पर एक सेंपलिंग करवाई जाएगी।
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