वीरपुर खुर्द विस्थापित क्षेत्र में हजारों परिवार की प्यास बुझाने के लिए लाखों की लागत से ओवरहेड टैंक तो बनाया गया। लेकिन, साल भर बाद भी टैंक में पानी भरने के लिए ट्यूबवेल का निर्माण और घरों तक पानी पहुंचने वाली पाइप लाइन नहीं बिछ सकी। नतीजतन पेयजल योजना में लाखों खर्च होने के बाद भी क्षेत्र के लोगों के हलक आज भी प्यासे हैं।
पशुलोक बैराज मार्ग स्थित वीरपुर खुर्द विस्थापित क्षेत्र में करीब चार हजार की आबादी है। सरकारी पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से करीब दो साल पहले जिला योजना से क्षेत्र में ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल और करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाने का कार्य स्वीकृत हुआ। पेयजल योजना के लिए शासन ने 19.60 लाख का बजट अवमुक्त किया।
कार्यदायी संस्था पेयजल निगम ने अनुमानित बजट से विस्थापित क्षेत्र को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग के लिए ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया। विडंबना है कि निर्माण के साल भर बाद से ओवरहेड टैंक शोपीस बना हुआ है। दरअसल, ओवरहेड टैंक को पानी से भरने के लिए अभी तक ट्यूबवेल का निर्माण नहीं कराया जा सका है।
इसके अलावा घरों तक पेयजल पहुंचने के लिए पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी अधूरा पड़ा है। ऐसे में मार्ग किनारे बना ओवरहेड टैंक स्थानीय लोगों को मुंह चिढ़ाता नजर आता है।
450 हजार केएल क्षमता
नवनिर्मित ओवरहेड टैंक की क्षमता 450 हजार किलोलीटर की है। टैंक से पेयजल आपूर्ति सुचारु होने पर वीरपुर खुर्द विस्थापित क्षेत्र में पीने के पानी की कमी नहीं होगी।
टैंकर बुझ रही प्यास
वीरपुर खुर्द विस्थापित क्षेत्र में पेयजल संकट किस कदर गहराया हुआ है इसकी बानगी है टैंकर से हो रही पेयजल आपूर्ति। स्थानीय लोगों का कहना है कि बैराज स्थित ट्यूबवेल से क्षेत्र में पानी सप्लाई होता है। आबादी के हिसाब से ट्यूबवेल की क्षमता कम होने से गर्मी में पीने के पानी के लिए हाहाकार मचा रहता है। ऐसे में घरेलू कामकाज निपटाने और हलक तर करने के लिए पानी के टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है। लोगों के लिए यह व्यवस्था अपर्याप्त है।
लापरवाही पर कार्रवाई हो
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य गुरविंदर सिंह गुर्री ने बताया कि पेयजल योजना जनता को राहत पहुंचाने के लिए स्वीकृत हुई थी। लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने शासन से मामले की जांच कर लापरवाही बरतने वाले विभाग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इनका कहना है
जिला योजना से स्वीकृत पेयजल योजना के तहत पुराने ट्यूबवेल से ओवरहेड टैंक में पानी भरने की व्यवस्था होनी थी। लेकिन ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताते हुए नए ट्यूबवेल निर्माण की मांग उठाई, जिससे योजना अधर में लटक गई। अब नए ट्यूबवेल का इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। वित्तीय मंजूरी मिलते ही पेयजल व्यवस्था सुचारु कर दी जाएगी।
-सीताराम, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम, देहरादून