तीन साल बाद भी जानकी सेतु का काम पचास फीसदी पूरा नहीं हो पाया। तीन लेन पुल निर्माण की धीमी गति तीन जिलों के लोगोें के लिए मुसीबत बन गई है। काम की यह गति बताती है कि यहां डेट पर डेट तो बढ़ती जा रही है पर काम की गति बेहद सुस्त है।
बता दें कि यदि थ्रीलेन पुल बनकर तैयार हो जाता तो मुनिकीरेती और लक्ष्मझूला क्षेत्र के लोगों को जाम के झाम से निजात मिल जाती। पुल बन जाने पर तीर्थनगरी से स्वर्गाश्रम जाने के लिए लोगों को एक किमी का अतिरिक्त सफर तय नहीं करना पड़ेगा। लेकिन कार्यदायी संस्था पीडब्लूडी निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाने के बजाय सुस्त पड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में पुल निर्माण कार्य की लागत बढ़ने पर स्थानीय निवासियों को आशंका है कि बजट का अभाव बताकर कार्यदायी संस्था कार्य पूरा करने से हाथ खड़ा कर सकती है।
2013 में सरकार से मिली थी स्वीकृति
रामझूला और लक्ष्मणझूला पुल पर आवाजाही के लिए बढ़ते दबाव को देखते हुए प्रदेश सरकार ने 25 मार्च 2013 को गंगा नदी के ऊपर जानकी सेतु पुल निर्माण की स्वीकृति दी थी। 274 मीटर थ्रीलेन झूला पुल निर्माण के लिए 35 करोड़, 45 लाख 53 हजार की धनराशि स्वीकृत की गई थी। कार्यदायी संस्था पीडब्लूडी नरेंद्रनगर ने निर्माणदायी संस्था हिलवेज कंपनी के सहयोग से 10 फरवरी 2014 को कार्य शुरू किया था। कार्य पूरा करने की तिथि अगस्त 2015 निर्धारित की गई थी। लेकिन इस अवधि में पुल का बेसमेंट भी तैयार नहीं हो पाया। निर्माण पूरा करने के लिए एक वर्ष यानी मार्च 2016 की कार्य अवधि बढ़ाई गई। निर्धारित तिथि बीतने के छह माह बाद अभी तक थ्रीलेन पुल का पिलर तक खड़ा नहीं हो सका। अब कार्यदायी संस्था जून 2017 तक कार्य पूरा करने का दम भर रही है लेकिन गिनती के मजदूरों से जिस कछुवा गति से काम चल रहा है। उस स्थिति में वर्ष 2017 तक भी कार्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण है।
थ्रीलेन पुल निर्माण पूरा होने से पौड़ी, टिहरी और देहरादून जिले की सरहद में बसे लोगों को गंगा आरपार जाने में सुविधा मिलेगी। गंगा के उस पार बसे स्वर्गाश्रम क्षेत्र के लोगों को तीर्थनगरी आने के लिए रामझूला, मुनिकीरेती में जाम से नहीं जूझना पड़ेेगा। क्योंकि रामझूला और लक्ष्मणझूला पुल पर हर समय भारी जन दवाब रहता है। ऐसे में स्कूलों बच्चों और वृद्धों ंको वहां से आगमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कोट
थ्रीलेन पुल का बेसमेंट तैयार करने में अधिक समय लग गया। निर्माण कार्य पर अभी तक करीब 27 करोड़ 46 लाख का खर्च हो गया है। जून 2017 तक पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा।
- विवेक सेमवाल, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर उपखंड मुनिकीरेती