डीएफओ नीरज शर्मा ने कहा कि आगामी फायर सीजन को देखते हुए थानो रेंज के अन्तर्गत छह क्रू-स्टेशन और एक मास्टर कंट्रोल रूम बनाया गया है। रेंज के अंतर्गत तीन वाॅच टावर भी बनाए गए हैं। जिनसे वनाग्नि की घटनाओं पर नजर रखी जाएगी।
डीएफओ शनिवार को थानो वन विश्राम भवन में वन अग्नि सुरक्षा गोष्ठी, प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रम काे संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विभिन्न ग्रामसभाओं के निवर्तमान ग्राम प्रधान, वन पंचायत सरपंच, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, एनजीओ, वन कर्मचारी और अधिकारियों ने भाग लिया।
उन्होंने कहा कि थानो वन रेंज में चीड़ के पेड़ काफी हैं। जिनकी पिरूल से वनों में अग्नि धधकती है। पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन के कारण वर्तमान वनाग्नि रोकने में जनसहयोग की कमी हुई है। पहाड़ के लोग पहले चीड़ के कोन का प्रयोग ईंधन के रूप करते थे। लेकिन अब घर-घर कुकिंग गैस होने के कारण चीड़ के कोन का प्रयोग लोग नहीं करते हैं।
रेंजर एनएल डोभाल ने कहा कि बीते फायर सीजन में फायर की एक या दो घटनाएं हुई थी। लोग चीड़ पिरूल का प्रयोग गोशालाओं में खाद बनाने के रूप में कर सकते हैं। सहायक वन संरक्षक अनिल सिंह रावत ने कहा कि जंगलों के किनारे बसे लोगों और वन विभाग पर वनाग्नि रोकने की अहम जिम्मेदारी है।
सामाजिक कार्यकर्ता महिपाल कृषाली ने कहा कि वन विभाग को आमजन के साथ तालमेल से कार्य करना चाहिए। विकास योजनाओं के कारण हर वर्ष हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं। जिससे देहरादून के तापमान 42 डिग्री को पार कर गया है। जबकि ढाई दशक पहले तक दून शिक्षा और बेहतर मौसम के लिए जाना जाता था। कार्यक्रम में करीब 100 से अधिक लोगों और जन प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर निवर्तमान क्षेत्र पंचायत सदस्य गडूल नरदेव पुण्डीर, नितिन रावत, शिवानी कण्डारी, विजय पंवार, नरेंद्र सिंह सोलंकी, रघुवीर सिंह सोलंकी आदि मौजूद रहे।