वन विभाग और टिहरी पुलिस प्रशासन की लापरवाही के चलते साहसिक खेलों के शौकीन लोगों को जान हथेली पर रखकर रिवर राफ्टिंग करनी पड़ रही है। राफ्टिंग कंपनियां अधिक मुनाफे के चक्कर में पर्यटकों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। आलम यह है कि गाइड और हेल्पर समेत नौ से 10 लोगों के लिए स्वीकृत राफ्टों में मानकों से अधिक पर्यटकों को बैठाया जा रहा है। लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।
रविवार को वीकेंड पर काफी संख्या में सैलानियों ने गंगा में व्हाइट वाटर राफ्टिंग का जमकर लुत्फ उठाया। इस दौरान गंगा में अधिकतर ओवरलोड राफ्टें तैरती नजर आईं। मुनिकीरेती पुलिस सूर्यास्त के बाद गंगा में उतरी राफ्टों के खिलाफ चालान की कार्रवाई कर रही है। लेकिन भरी दोपहरी में पर्यटकों की जान जोखिम में डालकर गंगा में तैर रही ओवरलोड राफ्टें पुलिस प्रशासन को नहीं दिख रही हैं।
इन पर कार्रवाई करने की बजाए पुलिस महकमा आंखें बंद किए हुए है। नौ से 10 लोगों के लिए स्वीकृत राफ्टों में संचालक अधिक मुनाफा कमाने की होड़ में 13 से 14 पर्यटकों को राफ्टिंग करा रहे हैं। रविवार को वीकेंड के चलते गंगा में ऐसी कई राफ्टें गंगा तैरती नजर आईं। गिनी चुनी राफ्टों को छोड़ दें तो अधिकांश में स्थिति मानकों के विरुद्घ थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन की मिलीभगत से राफ्ट संचालक ओवरलोड राफ्टों को गंगा में उतारते हैं। उनका दावा है कि पुलिस की मूक सहमति के बिना क्षेत्र में राफ्टों का गंगा में उतरना भी मुश्किल है।
जब से राफ्ट संचालकों ने वन विभाग पर नीरगड्डूू में अवैध वसूली का आरोप लगाया है, तब से विभाग ने उक्त चेक पोस्ट पर राफ्टों की चेकिंग बंद कर दी है। अब यह जिम्मेदारी वन निगम के पास चली गई है। जल्द ही इसकी बैठक होने जा रही है। बैठक में क्या निर्णय होंगे, यह उसके बाद ही सामने जाएंगे।-बीएल टम्टा, रेंज अधिकारी, शिवपुरी, नरेंद्र नगर वन प्रभाग
ओवरलोड राफ्टों को रोकना पर्यटन विभाग का काम है। पुलिस हर समय ओवरलोड राफ्टों पर नजर नहीं रख पाती है। लेकिन फिर भी ओवरलोड राफ्टें गंगा में तैरती हुई दिखाई देंगी तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-चंदन सिंह बिष्ट, थाना प्रभारी निरीक्षक, मुनिकीरेती