परमार्थ निकेतन गंगातट पर मंगलवार से तीन दिवसीय गंगा महोत्सव का रंगारंग आगाज शुरू हो गया। नदी नारायणी नृत्य ने गंगा प्रेमियों का मन मोह लिया। गंगा, यमुना, गोमती, नर्मदा, शिप्रा, सरयू आदि विभिन्न नदियों का रुप धारण कर महिलाओं ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही संत, महात्माओं ने पर्यावरण संरक्षण पर व्याख्यान दिया।
मंगलवार को गंगातट पर आयोजित तीन दिवसीय गंगा महोत्सव का शुभारंभ वन मंत्री दिनेश अग्रवाल और आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने किया। वन मंत्री अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए परमार्थ की यह अच्छी पहल है। नृत्य के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और गंगा को प्रदूूषण मुक्त बनाने का संदेश जन-जन तक पहुंचेगा। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में जन जागृति आएंगी।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अब समय आ गया है, जब राष्ट्रीय धरोहर गंगा विश्व धरोहर बने, गंगा केवल स्नान तक ही सीमित नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और सभ्यता की सांसें भी गंगा से जुड़ी हैं। आध्यात्मिक स्वर्ग से नीचे उतरकर मैदानी भागों में प्रवाहित होने वाली गंगा करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणादायी बनी हुई है। स्वामी ने कहा कि तीन अरब लीटर गंदगी रोजाना सीवरेज और फैक्ट्रियों के कचरे के रुप में गंगा में गिरती है। जिसमें 80 फीसदी सीवरेज का प्रदूषण है।
पांच राज्यों के 50 बड़े महानगरों की गंदगी इसमे शामिल हो रही है। इसकी रोकथाम के लिए केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध मोक्षदायिनी को प्रदूषण मुक्त किया जाएगा। इस मौके पर यूनेस्को के भारत निदेशक डा. रामभुज, स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी असंगानंद सरस्वती महाराज, पंतजलि विश्वविद्यालय कुलपति बालकृष्ण, साध्वी भगवती सरस्वती, परमजीत सिंह चंडोक, डा. लोकेश मुनि आदि मौजूद थे।