एम्स के नवनियुक्त निदेशक डा. संजीव मिश्रा
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एम्स के नवनियुक्त निदेशक डा. संजीव मिश्रा का कहना है कि उनकी प्राथमिकता प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और नए शोध कार्यों को बढ़ावा देना है। अगले तीन से चार माह में आकस्मिक सेवा शुरू करने की तमाम कोशिशें की जा रही हैं।
दरअसल, एम्स निदेशक का कार्यभार संभालने के बाद डा. मिश्रा मंगलवार को पहली बार पत्रकारों से रूबरू हुए। बताया कि ऋषिकेश एम्स अभी शिशु अवस्था में है और इसकी सेवाओं में विस्तार करने की अभी बहुत जरूरत है। पूर्व निदेशक के कार्यों को वे आगे बढ़ाने का काम करेंगे। बताया कि जरूरत के हिसाब से फिलहाल 90 फैकल्टी कार्यरत है। आकस्मिक सेवाओं के लिए बहुत अधिक संसाधनों, डाक्टरों और पैरामेड़िकल स्टाफ की जरूरत होती है।
इसीलिए आकस्मिक सेवा शुरू करने में अभी तीन से चार माह का वक्त और लग सकता है। एम्स विस्तार के लिए अभी कितनी और भूमि चाहिए। इन सब बातों की पड़ताल करने के बाद वे शासन स्तर पर भूमि के लिए पैरवी करेंगे। बेड़ क्षमता को 200 से 500 करने के लिए भी वे प्रयासरत है। वार्ता के दौरान डीन डा. लतिका मोहन, सीएमएस डा. एके त्रिवेदी, पीआरओ हरीश थपलियाल, त्रिलोक खरोला भी उपस्थित थे।
नियुक्ति में सियासी दबाव से इंकार, विवाद से किनारा
एम्स में तृतीय, चतुर्थ श्रेणी और पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति को लेकर राजनीति से जुड़े व्यक्तियों और बड़े नौकरशाहों का दवाब होने के सवाल पर उन्होंने किसी भी दबाव से इंकार किया। कहा कि उनको निदेशक कार्यभार संभाले 12 दिन हो चुके है। लेकिन अपने लोगों को नियुक्ति देने के मामले में एक भी फोन किसी का नहीं आया है। साथ ही उन्होंने पूर्व में हुए विवाद और तत्कालीन निदेशक के इस्तीफे को लेकर पूछ गए सवालों से यह कहकर किनारा कर लिया कि इन सभी बातों से उनका कोई संबंध नहीं है।