ऋषिकेश। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखंड की महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता जाहिर की। कहा कि यहां विशेषकर महिलाएं ऑस्टियोपोरोसिस और एनीमिया जैसी बीमारियों से प्रभावित हो रही हैं। एम्स जैसे संस्थानों को ग्लोबल मेडिसिन के इस युग में दवाइयों से जुड़ी राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय समस्याओं पर अनुसंधान व उनके समाधान को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स ऋषिकेश जनस्वास्थ्य एवं सामुदायिक स्वास्थ्य पर अधिक से अधिक ध्यान दे। ऐसा करके स्वस्थ भारत और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकेंगे। राष्ट्रपति ने कहा कि किसी की जान बचाने से जो संतोष मिलता है उसे केवल डॉक्टर ही समझ सकता है। डॉक्टर के लिए इलाज करना पेशा नहीं है बल्कि एक मिशन है। मानवता की अनवरत सेवा करने का अभियान है।
एम्स ऋषिकेश पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की दूरदर्शी सोच परिणाम : गुरमीत सिंह
ऋषिकेश। दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अलावा राज्यपाल ले. जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह, नीति आयोग भारत सरकार के सदस्य डॉ. वीके पॉल, एम्स अध्यक्ष प्रो. समीरन नंदी और निदेशक प्रो. मीनू सिंह रहे। राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि यह समारोह स्नातक चिकित्सकों, नर्सों की उपलब्धियों का उत्सव है। कहा कि एम्स ऋषिकेश पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की दूरदर्शी सोच परिणाम है। नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने एम्स ऋषिकेश को उत्तराखंड के लोगों के लिए आशा की किरण बताया, जो दुर्गम पहाड़ी राज्य के गंभीरतम मरीजों को आवश्यक तृतीयक देखभाल सेवाएं प्रदान करता है।
एम्स के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. समीरन नंदी ने संस्थान की टेलीमेडिसिन सर्विसेस को चिकित्सा क्षेत्र में माइल स्टोन बताया। साथ ही कहा कि संस्थान एविडेंस बेस्ड मेडिसिन पर प्राथमिकता से कार्य कर रहा है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने एम्स की सेवाओं के बारे में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को सही और समय पर उपचार मिले हम इसके लिए संकल्पबद्ध हैं। निदेशक एम्स ने प्रोजेक्ट संजीवनी से हेली एंबुलेंस आपात चिकित्सा सेवा को राज्य के लिए वरदान बताया। डाॅ. मनु मल्होत्रा और डॉ. जयंती पंत ने संचालन किया।
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इनको मिली उपाधि
दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं में एमबीबीएस 2013 बैच से 1, 2015 बैच से 1 और 2017 बैच के 98 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इनके अलावा बीएसएसी नर्सिंग 2017 बैच के 57, बीएससी नर्सिंग 2018 बैच के 97 और बीएससी नर्सिंग 2019 बैच के 100 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। एमएससी नर्सिंग के 2021 बैच के कुल 9 छात्र-छात्राओं को भी डिग्री प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि समारोह में एमडी/एमएस में 2020 बैच के 4, 2021 बैच के 111, डीएम/एमसीएच में 2021 बैच के 31, मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ वर्ष 2022 बैच के 10 और बीएससी एलाइड हेल्थ साइंस 2019-20 बैच के 67 छात्रों सहित पीएचडी करने वाले वर्ष 2017-19 बैच के 12 छात्र-छात्राओं को भी उपाधि प्रदान की गई।