आर्थिक तंगी का असर आईडीपीएल में भी देखने को मिला। यहां रावण को बिना कुटुंब के ही जलाया गया। यानी कुंभकरण और मेघनाद के पुतले नहीं जलाए गए। मंगलवार को आईडीपीएल की आर्थिक तंगी की मार रावण के संगे-संबंधियों को भी उठानी पड़ी। आयोजक इस बार भी पैसे की कमी के कारण मेघनाद व कुंभकंरण का पुतला खड़ा न कर सके। जिस कारण रावण को अकेले ही जलना पड़ा।
आईडीपीएल बंदी के बाद रामलीला का उत्सव भी फीका पड़ गया है। आईडीपीएल जब चलती हालत में था तो यहां अयोजित की जाने वाली रामलीला दूर-दूर तक प्रसिद्ध थी। साथ ही दशहरा पर्व पर रावण, मेघनाद व कुंभकरण के पुतले भी देखने लायक होते थे। पुतलों में हजारों रुपये के पटाखे इस्तेमाल होते थे। मगर, आर्थिक तंगी के कारण पिछले कुछ सालों से सिर्फ रावण का ही पुतला दहन किया जाता है।
हालांकि इसके बावजूद लोगों ने पर्व को धूमधाम से मनाया। सुबह न्यू दशहरा कमेटी ने बच्चों की साइकिल रेस का आयोजन किया। रामलीला मैदान में कई स्टाल लगाए गए। खेल खिलौनों की दुकानों पर बच्चों की खासी भीड़ उमड़ी। मुख्य अतिथि आईडीपीएल फैक्ट्री के महाप्रबंधक जीएस बेदी ने रावण के पुतले को आग लगाई। इस मौके पर उप कार्मिक प्रबंधक समर सिंह, सुनील कुटल्हेडिय़ा, धमेंद्र त्यागी आदि मौजूद रहे।