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एम्स ऋषिकेश में प्लाज्मा थेरेपी हुई शुरू

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ऋषिकेश। एम्स ऋषिकेश में कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा डोनेशन प्रारंभ हो चुका है। तीन कोविड 19 संक्रमण से ठीक हुए मरीजों से तीन यूनिट कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा एकत्रित किया गया। प्रदेश में यह थेरेपी पहली बार एम्स ऋषिकेश में शुरू हुई है।
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एम्स ऋषिकेश के विशेषज्ञ चिकित्सकों के मुताबिक कोविड19 की बीमारी के उपचार में कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा थेरेपी उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अनुक्रम में आईसीएमआर की ओर जारी गाइडलाइन का पालन करते हुए देश-विदेश में यह थेरेपी प्रारंभ हो चुकी है। कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा उन रक्तदाताओं से एकत्रित किया जाता है, जो कोविड19 संक्रमण से ठीक हो चुके हो। साथ ही जिनमें उपचार के बाद वायरस की उपस्थिति नगण्य हो। यह केवल विशिष्टरूप से उन स्वस्थ हो चुके लोगों से ही एकत्रित किया जाता है, जो रक्तदान के लिए योग्य हों। इस मौके पर एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने बताया कि उन्होंने कोविड19 के संक्रमण से उबरने वाले लोगों से आह्वान किया कि जिन एंटीबॉडीज ने इस बिमारी से जीतने में मदद की, उनके प्लाज्मा से इन रोगियों की मदद की जाएगी। डा. प्रसन्न कुमार पांडा ने बताया कि एक कोविड19 से ग्रसित मरीज को दिए जा रहे अन्य तरह के उपचार से लाभ प्राप्त नहीं हो रहा था। लिहाजा ऐसे मरीज में कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा थेरेपी प्रारंभ की गई। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एंड ब्लड बैंक विभागाध्यक्ष डॉ.गीता नेगी ने कहा कि कोई भी कोरोना संक्रमित व्यक्ति जो नेगेटिव आ चुका हो, वह नेगेटिव आने के 28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट कर सकता है। ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दलजीत कौर, डॉ. सुशांत कुमार मीनिया व डॉ. आशीष जैन ने कॉनवेल्सेंट रक्तदाताओं से अपील की है कि वे इस प्रकिया के बारे में जनसामान्य में अधिक जागरुकता फैलाएं। ताकि भविष्य में कॉनवेल्सेंट प्लाज्मा यूनिट्स की कमी नहीं पड़े। बताया कि एम्स के ब्लड बैंक में किसी भी समय आकर इससे संबंधित संपूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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