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त्रिवेणीघाट पर जल्द आएगी गंगा की स्थायी जलधारा

Thu, 06 Apr 2017 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ऋषिकेश।
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गंगा की स्थायी जलधारा के तट से दूर होने पर बीच में बना टापू। - फोटो : amar ujala.
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तीर्थनगरी की हृदयस्थली त्रिवेणीघाट पर गंगा की स्थायी जलधारा जल्द आएगी। इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा कराई गई मॉडल स्टडी में कंसल्टेंसी एजेंसी ने हरी झंडी दे दी है। विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट में त्रिवेणी के घाटों से काफी दूर बह रही जलधारा को सालभर घाटों तक लाने के लिए उपाय भी सुझाए हैं।
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महकमा योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति के बाद जल्द डीपीआर शासन को भेजेगा। इसके बाद योजना का क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि त्रिवेणीघाट से गंगा की स्थायी जलधारा लगभग दो दशक से दूर बह रही है। साल के महज तीन महीने बरसात के दिनों को छोड़कर अवशेष नौ महीने जलधारा मुख्य घाटों से करीब सौ मीटर दूर बहती है।

इसके कारण तीर्थयात्रियों को पर्व-त्योहारों और रोजमर्रा के दिनों में डुबकी लगाने, आचमन आदि मेें दिक्कतें आती हैं। इस बीच घाट और जलधारा के बीच पथरीला टापू बन जाने से खासकर महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को इससे खासी दिक्कतें होती है। 
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स्थानीय लोग काफी समय से सरकार से इसकी मांग उठाते रहे हैं। इतना ही नहीं 2011 से अब तक दो मुख्यमंत्री इसकी घोषणा कर चुके हैं। मगर अब तक इस दिशा में कार्यवाही धीमी गति से चल रही थी।

सिंचाई विभाग द्वारा सीएम स्तर से घोषणा के बाद करीब चार साल पहले जलधारा को स्थायी तौर पर घाट तक लाने के लिए पहली मर्तबा मॉडल स्टडी का प्रस्ताव बनाया गया था, जिसे राज्य सरकार और कुंभ मेला प्रशासन को भेजा गया। तीन साल पहले मंजूरी मिली। मॉडल स्टडी की रिपोर्ट अब आई है।

कंसल्टेंसी एजेंसी पीकेएस इंफ्रा की रिपोर्ट के मुताबिक योजना को धरातल पर उतारने और गंगा की जलधारा को त्रिवेणी की ओर मोड़ने के लिए गंगा और चंद्रभागा नदी के मुहाने पर मायाकुंड क्षेत्र में नदी के किनारे कंक्रीट से आकर्षक स्पर तैयार किए जाएंगे। जिनकी मदद से जलधारा बारों माह त्रिवेणीघाट से होकर गुजरेगी। 


विभागीय सूत्रों के मुताबिक इस योजना में अनुमानित ढाई करोड़ की लागत आएगी। विभागीय अधिशासी अभियंता आरके तिवारी ने बताया कि फिलहाल कंसल्टेंसी रिपोर्ट को तकनीकी स्वीकृति के लिए मुख्य अभियंता के माध्यम से शासन को भेज रहा है। इसके बाद इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जाएगी। 
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