बिजली घर से सटा प्लाॅट अभी भी बना है तालाब, वैकल्पिक व्यवस्था से बिजली की आपूर्ति
विगत दिनों हुई तेज बारिश से वीरभद्र स्थित 220 केवी बिजलीघर के अंदर पानी घुसने से लाखों रुपये के पैनल खराब हो गए हैं। बिजलीघर से सटे खाली प्लॉट अभी भी पानी से लबालब भरे हैं। ऊर्जा निगम वैकल्पिक इंतजाम कर क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति कर रहा है।
लगातार हो रही बारिश के कारण 16 अगस्त को बरसात का पानी आईडीपीएल फैक्टरी के पीछे जंगल से सीधे वीरभद्र स्थित 220 केवी बिजलीघर के पास पहुंच गया था। नाले का पानी सीधे बिजलीघर के पैनल रूम में घुस गया। जिससे ऊर्जा निगम को बिजलीघर को बंद करना पड़ा था। बापूग्राम, आईडीपीएल, श्यामपुर, रायवाला और अन्य स्थानों की लाइट रात दो बजे बंद करनी पड़ी थी। अगली शाम छह बिजली आपूर्ति बहाल हो पाई थी। अभी वह बिजलीघर काम नहीं कर रहा है। वैकल्पिक तौर पर परिसर के दूसरी छोर पर स्थित बिजलीघर से बिजली आपूर्ति की जा रही है।
1960 में बना बिजली घर नहीं हुई मरम्मत
वीरभद्र स्थित बिजलीघर 1960 में बना था, लेकिन राज्य गठन के बाद वहां पर बिजलीघर को अपग्रेड नहीं किया गया। स्थिति यह है कि बरसात में बिजलीघर की छत से पानी टपकने के कारण पैनल के ऊपर ऊर्जा निगम के कर्मचारियों को प्लास्टिक की पन्नी डालनी पड़ी।
बिजलीघर के पास खाई खोदने की नहीं सुध
पिटकुल और यूपीसीएल ने वीरभद्र स्थित 220 केवी के बिजलीघर के अंदर पानी घुसने का अंदाजा ही नहीं लगाया था। इसलिए अधिकारियों ने बिजलीघर के पास में खाई खुदवाने या फिर सीसी दीवार लगाने के बारे नहीं नहीं सोचा। पानी घुसने के बाद अब बिजलीघर के पास नाली बनाने की बात कही जा रही है।
गुमानीवाला का पानी घुस रहा बिजलीघर में
गुमानीवाला की गलियों से निकलने वाला पानी डीएसबी स्कूल के सामने रेलवे पटरी से जेजी ग्लास फैक्टरी के बगल में जा रहा है। यहां से यह पानी आईडीपीएल की भूमि से होकर 220 केवी बिजलीघर में पहुंच रहा है।
बरसाती पानी आने से बिजलीघर को नुकसान हुआ है। बिजलीघर 1960 का है। आईडीपीएल की भूमि से पानी सीधे बिजलीघर के अंदर घुसा, जिससे कई पैनल खराब हो गए। वहीं मनसा देवी, गुमानीवाला का पानी बिजलीघर में पहुंच रहा है। - शक्ति प्रसाद, अधिशासी अभियंता ऊर्जा निगम ऋषिकेश