राजकीय चिकित्सालय में कोविड की जांच करते चिकित्सक ।
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ऋषिकेश। एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में कोविड-19 जांच के कारण ओपीडी में मरीजों की संख्या में 50 फीसद गिरावट आ गई है। इससे सरकार को भी रोजाना हजारों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। वहीं, प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या में रोजाना बढ़ोतरी होने से उनकी खूब चांदी कट रही है।
कोरोना वैश्विक संक्रामक बीमारी को रोकने के लिए एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में बीते एक महीने से ओपीडी में आ रहे सभी मरीजों की कोरोना जांच हो रही है। बिना कोरोना जांच की मरीजों की ओपीडी पर्ची नहीं कट रही है। अस्पताल में सुबह 8 बजे से 2 बजे तक कोरोना जांच के लिए मरीजों को लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। अस्तपाल में कोविड-19 जांच के कारण मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन गिरावट आ रही है।
पहाड़ी क्षेत्रों की बात करें तो टिहरी और पौड़ी जिले के करीब दो दर्जन से अधिक गांव के लोग इस अस्पताल में उपचार करने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जब से अस्पताल में कोविड-19 की जांच शुरू हुई है। पहाड़ से आ रहे मरीजों की संख्या में भी गिरावट हो गई है। यह मरीज अब सरकारी के बजाय प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।
हैरत की बात है कि अस्पताल में कोविड-19 जांच के सैंपल अनिवार्य नहीं है, उसके बावजूद भी अस्पताल परिसर में ओपीडी मरीजों की जांच की अनिवार्यता कर दी है। जिससे मरीजों का अस्पताल में आना बंद हो गया है। फिजिशियन चिकित्सक डॉ. सुरेश कोठियाल ने बताया कि आजकल अस्पताल में ओपीडी मरीजों की संख्या में गिरावट आ गई है। संभवत: इसका कारण अस्पताल में कोविड-19 जांच है। इससे पहले अस्पताल में रोजाना उनकी दो सौ से ज्यादा ओपीडी होती थी, लेकिन अब 50 से ज्यादा ओपीडी नहीं हो रही है।
कोट
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशानुसार अस्पताल में मरीजों के कोविड-19 के सैंपल लिए जा रहे हैं। यह बात सच है कि जब से अस्पताल परिसर में ओपीडी के मरीजों की कोरोना जांच हो रही है, तब से अस्पताल परिसर में ओपीडी में मरीजों की संख्या कम हो गई है। - डा. एमपी सिंह, प्रभारी, मुख्य चिकित्साधिकारी ऋषिकेश