शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन भक्तों ने मठ मंदिर और घरों में मां दुर्गा का तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की। वीरभद्र, कात्यायनी, सोमेश्वर नगर, चंद्रेश्वरनगर, भद्रकाली आदि मंदिरों में सुबह से पूजा अर्चना के लिए भक्तों की आवाजाही रही। शाम के समय मठ मंदिर माता के भजनों से गूंज उठे। सूर्यास्त के बाद व्रती लोगों ने विधिविधान के साथ मां दुर्गा की पूजा कर उपवास तोड़ा।
पंडित सुमित गौड़ ने बताया कि जिन लोगों की कुंडली में मंगल कमजोर होता है, उनके लिए माता चंद्रघंटा की पूजा विशेष होती है। नवरात्र के तीसरे दिन विशेष साधना से व्यक्ति निर्भय हो जाता है। मां चंद्रघंटा के माथे पर अर्धचंद्र सुशोभित है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है।
पौराणिक मान्यता है कि देवी दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का रूप तब धारण किया था, जब महिषासुर नाम के दैत्य का आतंक स्वर्ग पर बढ़ने लगा था। बहुत समय तक महिषासुर का आतंक और भयंकर युद्ध देवताओं के साथ चल रहा था। महिषासुर देवराज इंद्र का सिंहासन हासिल करना चाहता था और स्वर्ग लोक पर अपना आधिपत्य जमाना चाहता है।