नरेंद्रनगर से देहरादून शिफ्ट होने के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान अकादमिक शोध के मुकम्मल वातावरण से भी महरूम हो गया। संस्थान के सूत्रों की मानें तो नए स्थान पर अकादमिक शोध और वातावरण के लिए आवश्यक माहौल नहीं मिल रहा है।
एससीईआरटी को जिस राजीव गांधी नवोदय विद्यालय के छात्रावास भवन में संचालित किया जा रहा है, वहां पहले की अपेक्षा कम स्थान भी इसका एक कारण माना जा रहा है। स्थान की कमी संस्थान मेंअकादमिक शोध और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन और प्रतिभागियों की आवासीय व्यवस्था में भी आड़े आ रहा है।
लेकिन इस ओर गौर करने वाला कोई नहीं है। संस्थान के करीबी सूत्रों की मानें तो नरेंद्रनगर में एससीईआरटी के पास सभी विभागों के लिए अलग-अलग कक्षाओं की व्यवस्था थी। विभिन्न अकादमिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग हाल भी उपलब्ध थे। लेकिन दून के आरजीएनवी भवन में उक्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।
लिहाजा संस्थान को जरूरी गतिविधियों के लिए डायट पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे डायट के कार्य भी बाधित हो रहे हैं। दूसरा अहम पहलू यह भी है कि संस्थान को शोध संबंधी गतिविधियों के लिए नरेंद्रनगर में तयशुदा बजट में होटल उपलब्ध हो जाते थे। लेकिन देहरादून में होटलों का व्यय संस्थान के बजट से बाहर है।
शोध और प्रशिक्षण दून में और लाइब्रेरी नरेंद्रनगर में
एससीईआरटी को देहरादून शिफ्ट तो कर दिया गया, लेकिन शिफ्टिंग के लगभग तीन साल बाद भी संस्थान की लाइब्रेरी नरेंद्रनगर में ही संचालित है। शोध प्रशिक्षकों को शिक्षकों की प्रशिक्षण कार्यशाला के आयोजन के समय प्रतिभागियों को देने के लिए संदर्भ सामग्री की आवश्यकता होती है।
जो पुस्तकालय से उपलब्ध कराई जा सकती है। लेकिन संस्थान के नए भवन में इसकी व्यवस्था नहीं है। लिहाजा प्रशिक्षकों को परेशानी होती है। उन्हें अपने पास एकत्रित या निजी प्रयासों से प्रशिक्षणार्थियों के लिए संदर्भ सामग्री मुहैया करानी पड़ती है।
नरेद्रनगर-दून का तुलनात्मक अध्ययन
1-नरेंद्रनगर पहाड़ी परिवेश में चिंतन के लिए उपयुक्त-दून में शहरी वातावरण में व्यवधान
2-अकादमिक शोध के लिए दो सभागार, सूचना संप्रेषण तकनीकी कक्ष, अंग्रेजी प्रयोगशाला का अलग कक्ष-छात्रावास के हालों में चल रहा
3-अकादमिक परिसर अधिक था, प्रशिक्षण के दौरान आवासीय व्यवस्था सस्ते दर पर उपलब्ध- स्थान का अभाव, आवासीय सुविधा की कमी
यह बात सही है कि संस्थान में भवन का अभाव है। लेकिन एससीईआरटी के बाद प्रशिक्षण कार्यशालाओं के लिए सीमेट का भवन उपलब्ध है। रही बात लाईब्रेरी की, तो आधी पुस्तकें नरेंद्रनगर से मंगा ली गई हैं। जिन्हें स्थान की कमी के कारण विभिन्न स्थानों पर रखा गया है। अवशेष पुस्तकों को दून लाने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।-गीता नौटियाल, अपर निदेशक, एससीईआरटी