बंदरों के आतंक से निजात पाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदों को अभी लंबा इंतजार करना होगा। केवल एक पिंजरे के सहारे नगर और आसपास के क्षेत्रों में चल रही बंदर पकड़ने की मुहिम सबसे ज्यादा प्रभावित ग्रामीणों क्षेत्रों में कब पहुंचेगी, वन विभाग के अधिकारियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है।
उल्टे विभाग अपनी इस जिम्मेदारी को राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन के मत्थे डालने में लगा हुआ है। देहरादून वन प्रभाग की ऋषिकेश रेंज के अंतर्गत राजस्व ग्राम रायवाला, खांड गांव, गौहरीमाफी और प्रतीतनगर के ग्रामीण लंबे समय से बंदरों से निजात की गुहार लगा रहे है।
इन क्षेत्रों में आए दिन बंदरों के हमलों से घायल होने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। लेकिन वन विभाग के आला अधिकारी इस समस्या पर मौन हैं। उक्त राजस्व ग्राम राजाजी टाइगर पार्क की सीमा से सटे हुए हैं। लिहाजा यहां हिंसक जानवरों के साथ ही भारी संख्या में बंदरों की आवाजाही बनी रहती है।
ग्रामीण बंदरों के आतंक से परेशान होकर विभाग से शिकायत करते हैं। लेकिन दो रेंजों के बीच फंसे ग्रामीणों को कभी वन प्रभाग तो कभी पार्क प्रशासन के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है। दोनों विभाग बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी एक दूसरे पर डाल रहे हैं।
जबकि, इस काम के लिए वन प्रभाग की ऋषिकेश रेंज को बाकायदा बजट आवंटित किया गया है। लेकिन रेंज की ओर से बंदरों को पकड़ने का कार्य केवल शहरी क्षेत्र के आसपास की अंजाम दिया जा रहा है। प्रतीत नगर निवासी भगत सिंह नेगी, कमल कुमार, सुशील कुमार, शीला खरोला, झुमा देवी, आदि ने शीघ्र ग्रामीण क्षेत्रों में भी बंदरों से निजात दिलाने की गुहार लगाते हुए आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।
रेंज में बंदरों को पकड़ने के लिए केवल एक पिंजरा मिला है। जिससे लगातार बंदर पकड़ने का कार्य किया जा रहा है। रायवाला क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने के लिए कब समय मिलेगा, स्पष्ट नही कहा जा सकता है। पार्क सीमा से सटे गांवों में बंदर पकड़ने का कार्य पार्क कर्मियों को करना चाहिए।-गंगासागर नौटियाल, ऋषिकेश रेंज अधिकारी
मोतीचूर रेंज को बंदर पकड़ने का न तो बजट दिया गया है और न ही कोई आदेश है। वन प्रभाग को बंदरों को पकड़ने के लिए बाकायदा बजट मुहैया कराया गया है। वैसे भी राजस्व ग्रामों में बंदर पकड़ने की जिम्मेदारी वन प्रभाग की है।-महेंद्र गिरि गोस्वामी मोतीचूूर रेंज अधिकारी राजाजी टाईगर रिजर्व देहरादून।