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उत्तराखंड की लोक परंपरा का संवाहक है मुखौटा नृत्य : प्रो. महाजन

Mon, 02 Nov 2026 07:19 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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- श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश में उत्तराखंड की लोक परंपराओं पर आयोजित हुई कार्यशाला
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ऋषिकेश। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर ऋषिकेश के अंग्रेजी विभाग की ओर से सोमवार को उत्तराखंड की लोक परंपराओं में मुखौटा नृत्य की परंपरा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका शुभारंभ करते हुए विवि के कुलपति प्रो. अंबरीश कुमार महाजन ने कहा कि मुखौटा नृत्य उत्तराखंड की लोक परंपरा का संवाहक है। विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान और तकनीकी के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा व लोक संस्कृति का संरक्षण भी बेहद आवश्यक है। उत्तराखंड की लोक परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
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कार्यशाला में मुख्य वक्ता प्रो. डीआर पुरोहित ने कहा कि उत्तराखंड की लोक परंपराएं विज्ञान सम्मत सिद्धांतों पर आधारित हैं और हजारों वर्षों से अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। प्रदेश के गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक विभिन्न क्षेत्रों में मुखौटा नृत्य की अलग-अलग शैलियां प्रचलित हैं। ये परंपराएं न केवल सांस्कृतिक विरासत को सहेजे हुए हैं बल्कि इनके पीछे लोक जीवन और पारंपरिक ज्ञान की गहरी समझ भी समाहित है। मेरठ विवि के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष व उपन्यासकार प्रो. विकास शर्मा ने रचनात्मक लेखन के महत्व की जानकारी दी। कहा कि लेखन ज्ञान की सीमाओं को नया विस्तार देता है। उन्होंने अपने उपन्यास ऑल हर फायर की चर्चा करते हुए युवा पीढ़ी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में भी पढ़ने और लिखने की आदत विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक अच्छे रचनाकार के लिए संवेदनशील होना भी आवश्यक है। परिसर निदेशक प्रो. महावीर रावत ने कहा कि परिसर में अकादमिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए इस तरह की कार्यशालाओं का निरंतर आयोजन किया जाना चाहिए। कार्यशाला संयोजक प्रो. हेमंत कुमार शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना के तहत कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं को उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक करना है। कार्यक्रम में प्रो. हेमंत कुमार शुक्ला की ओर से संपादित न्यूजलेटर होराइजन पुस्तक का विमोचन भी किया गया। अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार कुकरेती ने कहा कि विभाग पश्चिमी साहित्य के साथ उत्तराखंड की लोक संस्कृति पर शोध करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। इस मौके पर डॉ. पारुल मिश्रा, प्रो. वीके श्रीवास्तव, प्रो. परवेज अहमद, प्रो. राकेश जोशी, डॉ. सुनील प्रसाद, डॉ. दर्शन सिंह नेगी, प्रो. सीएस नेगी सहित शोधार्थी दीपशिखा, इशिता, शालिनी, हिमांशु आदि मौजूद रहे।
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