आबादी में पहुंचकर लोगों को परेशान कर रहे बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग की मुहिम चौथे दिन भी जारी रही। सोमवार को तहसील क्षेत्र में लगे पिंजरे में चार बंद फंसे। वन विभाग बंदरों पर रंग से निशान लगाकर घने जंगल में छोड़ेगा।
इससे बाद में पता चल सकेगा कि कहीं पहले पकड़ा गया बंदर फिर से जंगल से निकलकर आबादी में तो नहीं आ गया।
बंदरों को ललचाने के लिए बड़े पिंजरे में केले रखे गए। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद बड़े पिंजरे में चार बंदर फंसे। उन्हें छोटे पिंजरे में शिफ्ट कर दून मार्ग स्थित रेंज कार्यालय लाया गया।
जहां पकड़े गए बंदरों के चेहरे पर सिंदूरी रंग के पेंट से निशान लगाया। वन क्षेत्राधिकारी गंगा सागर नौटियाल ने बताया कि पकड़े गए बंदर को चिह्नित किया जा रहा है। टीम में वनकर्मी मंसाराम गौड़, राजेश डोबाल, पीआरडी जवान रविकांत, जितेंद्र कुमार त्यागी शामिल थे।
तिलक मार्ग पर बंदरों का उत्पात
सोमवार को तिलक मार्ग पर बंदरों ने उत्पात मचाया। कई घरों की छतों पर पानी की टंकियों के ढक्कन उखाड़ दिए। सोलर लाइट तोड़ दी। भगाने पर लोगों को काटने के लिए दौड़े, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल रहा। क्षेत्रवासी शिवओम गौतम, मंगतराम, ललित मनचंदा, लवली ने बताया कि वन विभाग को सूचित कर बंदरों के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।