नगर पालिका अध्यक्ष सीट के अनारक्षित (सामान्य) होने से इस निकाय चुनाव में और अधिक घमासान के आसार हैं। 2018 के निकाय चुनावों में नगर पालिका अध्यक्ष की सीट ओबीसी थी। ओबीसी होने के बावजूद इस सीट पर तब भी घमासान मचा था।
भाजपा पृष्ठभूमि के दो और कांग्रेस के एक व्यक्ति ने बागी चुनाव लड़ा था। इसलिए इस बार सीट सामान्य होने से पिछली बार से अधिक घमासान के आसार दिखाई दे रहे हैं। दोनों ही दलों से दावेदारों की संख्या काफी अधिक हैं। लेकिन भाजपा में दावेदार अधिक हैं।
भाजपा में पुल से इधर भानियावाला, जौलीग्रांट, अठूरवाला, कांडरवाला आदि क्षेत्रों में गढ़वाली मतदाताओं और कुल मतदाताओं की संख्या पुल पार डोईवाला से अधिक है। इस क्षेत्र में डोईवाला के वार्ड दो, तीन, चार, पांच, छह, सात, आठ, नौ और दस हैं। जो पिछले निकाय चुनाव में भी नगर पालिका से जुड़े थे। इन वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के कई दावेदार हैं।
इसलिए दोनों पार्टियों के सामने सौंग पुल आर और पार के अलावा बड़ी संख्या में गढ़वाली मतदाताओं के समीकरण को साधना भी बड़ी चुनौती रहेगी। अकेले टिहरी विस्थापित क्षेत्र अठूरवाला में ही करीब 15000 मतदाता हैं। जो पहाड़ी मूल के प्रत्याशी को ही ज्यादा पसंद करते हैं। पिछली बार यही के मतदाताओं ने भाजपा का पूरा गणित बिगाड़ दिया था। जिससे भाजपा मामूली अंतर से हार गई थी।
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डोईवाला में सीट अनारक्षित हुई है। भाजपा निकाय चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। पार्टी का जो भी आदेश होगा। उसका पूरी तरह पालन किया जाएगा। इस बार पार्टी जिसे भी टिकट देगी। उसे भारी मतों से जीत मिलेगी। - बृजभूषण गैरोला, विधायक डोईवाला