परमारर्थ निकेतन आश्रम मे कुंभ 2021 को लेकर कुंभ कांक्लेव का शुभारंभ करते स्वामी चिदानंद सरस्वती व अ
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ऋषिकेश। हरिद्वार कुंभ 2021 को लेकर परमार्थ निकेतन आश्रम में कुंभ कांक्लेव का शुभारंभ किया गया। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कुंभ वस्तुत: धर्म संस्कृति के विकास का आधार है। कुंभ पर्यावरण, नदी, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों को बनाए रखने का संत, समाज और व्यवस्था का संकल्प है।
कार्यक्रम में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कहा कि कुंभ नदियों के किनारों पर ही होता है। प्रयाग में संगम पर मकरस्थ कुंभ, उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ, लेकिन हरिद्वार में कुंभस्त कुंभ होता है यानि जब बृहस्पति कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं, तब हरिद्वार के कुंभ की नक्षत्र तिथि आती है। कहा मानव ने प्राकृतिक संसाधनों का इतना दोहन कर डाला कि इस बार सिंहस्थ कुंभ क्षिप्रा के जल से नहीं अपितु नर्मदा के जल से संपन्न हुआ।
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के कुलपति डा. चिन्मय पांडे ने कहा कि गायत्री और यज्ञ का मूल कार्य प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण ही है। हमारे जीवन मूल्यों का आधार यज्ञीय आचरण ही है। प्रकृति हमें देती है, लेकिन प्रकृति को हम क्या दे रहे हैं, यह सोच का विषय है।
इस मौके पर इंडिया थींक कौंसिल के संयोजक सौरभ पांडे,ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की अंतरराष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति संजीव कुमार शर्मा, संजय पासवान, कपिल मिश्रा, ओंकार सिंह, आलोक पांडे, लोकेश शर्मा, अजय पंवार आदि मौजूद थे।