बदलते मौसम और दूषित वातावरण के चलते इन दिनों आसपास क्षेेेत्रों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना हुआ है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में चिकित्सकों के पास उपचार के लिए मलेरिया, दमा, खांसी, जुखाम जैसे कई बीमारियों से पीड़ित सैकडों मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। इन बीमारियों से बचने के लिए जहां लोग एलोपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं नरेद्रनगर वन विभाग मुनिकीरेती स्थित हर्बल गार्डन में इन बीमारियों से बचने के अनेक प्रजातियों के औषधीय पादप उपलब्ध हैं। जो आपकी बीमारियों को जड़ से दूर कर देगी। बस इसके लिए आपको केवल नानी, दादी मां के नुस्खे को याद करना पड़ेगा।
फरवरी 2006 में मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सुशीला हर्बल गार्डन का शिलान्यास किया था। इस गार्डन में नरेंद्रनगर वन विभाग के कर्मियों ने 80 प्रकार के विभिन्न प्रजातियों के औषधीय पादप रोपे। यह पादप लोगों के दमा, शूगर, मलेरिया, डेंगू, जैसे कई बीमारियों को दूर करने में कारगर साबित हैं।
वन दरोगा मोहन दत्त ने बताया कि गार्डन में अनेक बीमारियों से निजात पाने के लिए विभिन्न प्रकार के औषधीय पादप लगाए गए हैं। जरुरतमंदो को यह पौधे सरकारी दामों में उपलब्ध होते हैं।
ये औषधीय पादप हैं उपलब्ध
हर्बल गार्डन में इन दिनों, तुलसी पौधे की विभिन्न प्रजातियां मीठी तुलसी, श्यामा, रामा, कपूर, लौंग तुलसी उपलब्ध हैं, इसके अलावा पिपली, नीम, कालाबांसा, गुडमार, अनंत बेल, भृंगराज, जावाग्रास, अमृता, लेमनग्रास, हर श्रृंगार, रोजमेरी, मरवा, आक, कालमेघ स्टीविया आदि औषधीय पादप उपलब्ध हैं। जो विभिन्न प्रकार की संक्रामक बीमारियों को दूर करने का रामबाण इलाज हैं।
ऐसे होती है बीमारी दूर
वनस्पति वैज्ञानिक डा.राजन कुमार गुप्ता ने बताया कि लेमन ग्रास, हर श्रृंगार, रोजमरी और तुलसी के पत्ते की काड़ा चाय बनाकर इसे पीने से पाचन शक्ति बढ़ती है, बंद पडी नसें खुल जाती हैं, साथ ही घुटनों का दर्द दूर होता है। मरवा औषधीय पादप का सेवन करने से कैंसर बीमारी का रोकथाम होता है। स्टीविया पत्ते का सेवन करने से शूगर मरीज को इससे राहत मिलती है। अमृत नामक पौधे को पहाडीभाषा में गिलोय कहते हैं, इसकी जडों को उबालकर पीने से डेंगू बीमारी से रोकथाम मिलती है। ऐसे ही कई पौधे हैं जिनका सेवन करने से बीमारियां दूर होती हैं।